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न जाने क्यों
September 27, 2020 • ✍️राजीव डोगरा 'विमल' • कविता

✍️राजीव डोगरा 'विमल'

न जाने क्यों
खो सा गया है कही
मेरा मन।

न जाने क्यों
मिट्टी सा हो गया है
मेरा तन।

न जाने क्यों
टूट गया है,
उनकी याद में
ह्रदय का हर एक कण।

न जाने क्यों
बिखर गए है,
हर ख्वाब मेरे
फिक्र में उनकी हरदम।

*कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

 

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