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मुश्किलें और तरक्की
October 4, 2020 • ✍️बीना रॉय • लेख
✍️बीना रॉय
मुश्किलें और तरक्की, कहने सुनने या पढ़ने में ही बहुत अजीब लगेगा पर थोड़ी सी गम्भीर होते हुए इस शिर्षक पर विचार किया जाए तो इसका वास्तविक तात्पर्य समझने में बिल्कुल भी अजीब नहीं लगेगा किसी को भी।
जी हां  हमें एक सफल पर साथ साथ अपनी सफलता को कायम रखने की असली सीख तो मुश्किलें ही सिखाती हैं क्योंकि जब तक हमारे समक्ष मुश्किलें नहीं आतीं हमें अपने जीवन में उपलब्ध किसी भी रिश्ते ,पद प्रतिष्ठा का स्वत:  कोई कीमत समझ में नहीं आता और ना ही हम दिल से एक मजबूत इंसान बन पाते हैं जिसे अच्छे बुरे इंसान, विषय अथवा किसी भी बात की जानकारी हो ।
हमारे इस जीवन में जब तक हमारे साथ सब कुछ अच्छा चल रहा होता है तब तक तो हमारे चिरपरिचित लोगों को हम बहुत अच्छे लगते रहते हैं और हमें भी वो सब चिरपरिचित बड़े अच्छे, प्यारे अथवा यूं कहें कि चाशनी में डूबे हुए लगते हैं।
जब तक हम बिना मुश्किलों के जीवन जी रहे होते हैं,सब कुछ बड़ा अच्छा लगता है पर सच कहें तो जीवन का असली मजा तब आता है जब हम जीवन के मुश्किलों का सामना कर के चाशनी में डूबे हुए और बीच भंवर में हमारे साथ छोड़ने वाले रिश्तों से भली भांति परिचित हो जाते हैं। 
दरअसल होता ये है कि तब हमारे मन मस्तिष्क से  भ्रम के  धुंधले बादल  पूरी तरह छंट चुके होते हैं । यद्यपि प्रारंभ में कुछ कमजोर रिश्तों की टूटते डोरियो की व्यथा हमसे बर्दाश्त तो नहीं हो पाता है पर यकीन मानिए कुछ ही दिनों या महीनों के उपरांत हम स्वयं को  एक बहुत अलग किस्म के इंसान के रूप में पाते हैं जो कि बहुत ही समझदार और लगभग दूसरों के भी मुश्किलों को समझने वाला नेक इंसान बन चुका होता है।
अब यदि आप नेक दिल और पहले से साहसी इंसान में तब्दील हो चूके हैं तो आप के  चिरपरिचित व्यक्तियों में आप की चर्चा भी लाजमी ही है तो इस तरह से आप पहले के मुकाबले मुश्किलें झेलने के बाद स्वयं को अधिक प्रतिष्ठित पाते हैं और ऐसे में आप की आत्मविश्वास में वृद्धि भी  निश्चित ही है और जिस इंसान में आत्मविश्वास हो उसे तरक्की प्राप्त करने से भला कौन रोक सकता है अतः जीवन में आने वाले कुछ सामान्य मुश्किलों से बिल्कुल भी घबराएं नहीं बल्कि ये सोच रखते हुए उन मुश्किलों का डट कर सामना करें कि ये मुश्किलें हमें तोड़ने नहीं बल्कि एक साहसी निखरा हुआ और तरक्की  के पथ पर बढ़ने वाले इंसान में तब्दील करने आई हैं।
बाकी जो बड़ी बड़ी  और अवांछित मुश्किलें आती हैं , इसमें कोई दो राय नहीं है कि वे सब हमारे ही किसी अशुभ कर्मों के बदले हमारे समक्ष आती हैं  तो यदि हम इस बात को भी भली भांति समझ लें तो  निस्संदेह उन बड़ी बड़ी मुश्किलों में से भी  कुछ न कुछ  और शेष जीवन को अद्भुत, आलोकित और पुलकित करने वाले तथ्य  हमारे समक्ष अवश्य उपस्थित होते हैं।
 

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