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मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं 
June 10, 2020 • सुनील कुमार माथुर • कविता

*सुनील कुमार माथुर
सदा अपनें आप पर विश्वास रखों 
कभी भी दूसरों के भरोसे न बैठें 
चूंकि 
आलस्य से बडा कोई शत्रु नहीं है 
सजग रहें , सतर्क रहें 
कम बोलें  , अच्छा बोले ताकि 
शत्रु भी आपकी प्रशंसा करें 
बाहरी विवादों का असर
परिवार पर न होने दे 
अपने आप पर विश्वास रखों 
मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं 
अपने पराये में फर्क समझें 
बोलने से पहलें विचार करें 
दूसरों के निजी मामलों में 
बोलना बंद करें 
मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं 
अपने आप पर विश्वास रखों 
दूसरों के भरोसे न बैठें 
आलस्य से बडा कोई शत्रु नहीं 
सजग रहें  , सतर्क रहें 
विवादों में मौन रहें 
संभल कर रहें 
अपने व्यवहार में नम्रता रखें 
कॅरियर में निराश न हो
सुख शांति चाहते हो तो 
व्यवहार को बदलना होगा 
मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं 
अपने आप पर विश्वास रखों 
आलस्य से बडा कोई शत्रु नहीं 
सजग रहें  , सतर्क रहें 
मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं 
*जोधपुर राजस्थान
 

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