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February 20, 2020 • हमीद कानपुरी • दोहा/छंद/हायकु

*हमीद कानपुरी

किस तरह हो पुर भला।
जो    हुई   पैदा   खला।
आपका   जाना  हमीद,
इक  बड़ा है  मसअला।
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साथ सच के  सदा खड़े  रहना।
झूठ को सच नहीं कभी कहना।
सच को ज़ेवर  बना बना पहनो,
इससे बेहतर नहीं कोई  गहना।
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एक  से   एक  हैं  जब  यहाँ  हस्तियां।
डूबती क्यूँ भला  फिर यहाँ  कश्तियां।
आम  जनता  सिसकती फिरे  चार सू,
काटते    फिर  रहे   रहनुमा  मस्तियां।
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एक अम्बार सा  है लगा  हर  तरफ।
झूठ ही झूठ छाया हुआ  हर  तरफ।
सत्य हरगिज़ कहीं भी मिला ही नहीं,
सत्य को खूब ढूंढा गया  हर  तरफ।
 
*हमीद कानपुरी,कानपुर

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