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मॉ वरदान दो
October 17, 2020 • ✍️शिवकुमार दुबे • कविता
✍️शिवकुमार दुबे
तुम माँ शेर पर सवार होकर
मेरे शरीर को नोचने खसोटने
वालों का तुम खून चूस लेना माँ
जो मेरी इज्जत सरे राह तार तार
कर रहे उनका मुड़ तुम काटकर
गले मे लटका लो माँ
तू सर्वशक्तिशाली महा शत्रुहन्ता
हो माँ तुम मेरा शोषण करने वाले
का अपने सिंह छोड़कर ध्वंस करवा दो
हे माँ हमसे धोखा जालसाजी कर
हमारा प्रेम में धर्मांतरण करवाकर
हमे गुलाम बनाकर हमे लूटने वालो का 
विनाश कर दो माँ हे माँ हमे सदबुद्धि दो
ताकि हम अपना रास्ता विवेक के साथ चुन सके
हमारा बलात्कार कर हमें
मारकर रोड पर सुनसान 
जगहों पर फेककर मस्ती
करनेवाले वहशी लोगो
की ऐसी दुर्दशा करो माँ
जो तुम्हारी फूल से कोमल
सुकन्या का चीरहरण कर
उन्हें कलंकित कर असहाय
छोड़कर भाग जाते है
ऐसे दुष्ट जनो का मा तुम
संहार करो ताकि हम समाज 
में खुलकर जी सके सबके साथ
कंधे से कंधा मिलाकर सबकी प्रगति
में हिस्सेदार बन सकें
 

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