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मेरे प्यार की नाकामी  पे यूं ना हंसा करो ए दोस्त
July 23, 2020 • ✍️प्रेम बजाज • गीत/गजल

✍️प्रेम बजाज

मेरे प्यार की नाकामी  पे यूं ना हंसा करो ए दोस्त
मेरे ज़ख़्मों को ना सरेआम खोला करो  ए दोस्त ।
 
बड़ी शिद्दत से चाहता हूं उस बेवफ़ा को कैसे कहूं
लगा कर नज़र मेरे प्यार को ना आंहे भरो ए दोस्त ‌।
 
क्या हुआ ग़र उसने हर बार ठुकरा दिया प्यार मेरा 
दिला याद उसकी हर पल ना तड़पाते रहो ए दोस्त ।
 
ना कहना बेवफ़ा, उसकी तो फितरत है बेवफ़ाई की 
सी कर होंठों को  दर्द को सीने में छुपाओ ए दोस्त ।
 
ना समझा उसने "प्रेम" को कभी काबिल अपने तो क्या 
उसके नज़दीक जाने की हद  ना  समझाओ   ए दोस्त ।
   
*जगाधरी ( यमुनानगर )
 

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