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मेरा परिवार-मेरी ऊर्जा
May 16, 2020 • प्रो.शरद नारायण खरे • कविता


*प्रो.शरद नारायण खरे
पत्नी-बच्चे,मात-पित,बहनों से संसार ।
बंधु बांधव,यदि नहीं,तो कुछ भी ना सार ।।

सब रहते यदि प्रेम से,तो है चोखी बात ।
पर यदि कटुता है भरी,तो जीवन पर घात।।

नेह,समर्पण से बने,प्रियवर मीठी बात ।
भाव भरे मीठे ह्रदय,तो सचमुच सौगात ।।

एकाकीपन है कहर,बहुत बड़ा अभिशाप ।
आओ मिलकर के रहें,प्रियवर मैं औ' आप ।।

हर मुश्किल में हौसला,देता है परिवार ।
सब नेहिलता से रहो,यह चोखा उपहार ।।

बिन परिजन ना घर बने,खाली रहे मकान ।
जब घर 'घर' बनता 'शरद',तब बढ़ती है शान ।।

परिवारों की बात है,संस्कारमय गीत ।
अपनेपन से ही बढ़े,परिवारों में प्रीत ।।

आओ,हम वंदन करें,पालें बस यह भाव ।
हर दिल में परिवार प्रति,हो अपनापन-ताव ।।

*प्रो.शरद नारायण खरे,मंडला(म प्र)

 

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