ALL लॉकडाउन से सीख कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
मेरा मन बहा
May 9, 2020 • पुष्पा सिंघी

*पुष्पा सिंघी

नीचे झाँका मैंने
रद्दी वाले की आवाज सुनकर
और कहा उसको
ऊपर आने के लिए....

देखती हूँ मैं
मोटी रस्सी से बँधी हुई
ढ़ेर सारी काॅपी-किताबें
अरे हाँ... पुराना वर्ष खत्म हुआ
विद्यार्थी करेंगे अब
नयी कक्षा में प्रवेश....

जिन्होंने साथ दिया
विद्या अर्जित करने में
पेन-पेन्सिल के सहारे
सुधियाँ संजोयी पूरे वर्ष की
अगले पड़ाव में जाने हेतु
प्रगति-मानक जो बनी
वही काॅपी-किताबें बिक गयी
चंद सिक्कों में....

सच , आज तो रद्दी बनीं
पर उम्र के किसी पड़ाव पर
वो याद बहुत आयेंगी
और चाहकर भी
न लौटा पायेंगे उन सबको
मेरी तरह...हाँ, मेरी तरह..!!

*पुष्पा सिंघी , कटक

 

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.comयूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw