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मज़बूरी की मिसाल हैं , बच्चे ग़रीब के 
November 12, 2019 • अशोक'आनन' • गीत/गजल

*अशोक'आनन'*
 
मज़बूरी की मिसाल हैं , बच्चे ग़रीब के  ।
कई ज्वलंत सवाल हैं , बच्चे ग़रीब के  ।
 
जूठन को ही अपनी तक़दीर जो समझते -
तन  से  फटेहाल  हैं ,  बच्चे   ग़रीब   के  ।
 
प्रतिकूलताएं मौसम की जो झेलते रहे  -
जीवित ये बहरहाल हैं , बच्चे  ग़रीब  के  ।
 
स्वप्न जिनकी आंखों के पारे से बिखर गए -
फिर भी ये  खुशहाल  हैं , बच्चे  ग़रीब  के ‌।
 
लदा जिनके कांधों पर , बोझ विवशता का -
युग के गिरधर गोपाल हैं , बच्चे ग़रीब ‌के  ।
 
अपनों ने भी जिनको किया  सदा उपेक्षित -
उनके  लिए  जंजाल  हैं  , बच्चे  ग़रीब ‌ के  ।
                                            
बरसात बसा आंखों में  दु:खों  को  झेलते -
बेहाल  मां  के  लाल  हैं ,  बच्चे  ग़रीब  के  ।
 
आंधी , तूफ़ान  में  भी  जले  जो  हंसकर ‌-
अंधियारे  में  मशाल  हैं , बच्चे  ग़रीब  के  ।
 
धनवान को खटकते जो विपदाओं की तरह -
बाढ़  कभी  अकाल  हैं  ,  बच्चे  ग़रीब  के ‌।
 
*अशोक'आनन'मक्सी जिला-शाजापुर (म.प्र.),मोबाइल नं : 9981240575 / 9977644232
 

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