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मौन साधक - सेवृक्ष
July 8, 2020 • अशोक 'आनन' • गीत/गजल
*अशोक 'आनन'
 
वृक्षों  का  कुंभ ।
कुंभ में -
मौन - साधक - से  वृक्ष ।
 
कोई -
कांटों की शैया पर लेटा ।
तो कोई -
धूनी     रमाकर    बैठा ।
कोई -
एक पांव पर यहाॅं खड़ा ।
तो कोई -
नागा  बाबा -  सा  ऐंठा ।
 
सर्दी , गर्मी या हो बारिश
कोई न लेता -
इनका पक्ष ।
 
कोई
वृक्ष है यदि जटाधारी ।
तो कोई -
स्वभाव से है कड़वा ।
कोई -
शहद - सा है मीठा - मीठा ।
तो कोई -
रत्न - सरीखा है जड़वा ।
कोई -
साधना में  ध्यान मगन ।
तो कोई -
बूढ़ा  अभी  भी  है जवां  ।
 
पत्थर खाए युगों - युगों से
लोक हित ही  -
इनका जीवन - लक्ष्य ।
 
*मक्सी जिला - शाजापुर ( म. प्र .)
 

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