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मन - शुद्ध बनाता योग
June 21, 2020 • रामगोपाल राही  • कविता
*रामगोपाल राही 
 
तन को पुष्ट बनाता योग 
मन  - शुद्ध बनाता योग |
निर्मलता जीवन में आती ,
सोच प्रबुद्ध बनाता  योग ||
 
बदन चमकता रहे लचीला 
कम वजन कर  देता योग |
रहे शांति   स्थिरता  मन में      ,
तन- स्वस्थ बनाता योग ||
 
है शारीरिक लाभ योग से ,
लाभ मानसिक -करे योग |
श्वास क्रिया गुणकारी होती ,
मस्तिष्क स्वच्छ करे योग  ||
 
वैचारिकता निखरी  निखरी  ,
तन में फुर्ती लाता योग |
रहे ताजगी सच बदन में    
- उर्जा नित्य भरता योग ||
 
चिंताओं से राहत मिलती ,
जीवन  सहज  बनादे  योग |
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती 
तन  को  सजग बनादे  योग ||
 
तनावों  से दूर रहे मन ,
एकाग्र कर देता योग |
 प्रणाम ध्यान जीवन में 
शुद्ध भाव पनपाता  योग||
 
कार्य क्षमता  भी बढ़ाता ,
सुख शांति का दाता योग | 
ईश्वर से जुड़ाव हृदय से -
रखें -हमें सिखाता योग |
 
अंतर्दृष्टि ज्ञान बढ़ा - लाभ ,
 -कई   पहुँचाता  योग |
प्रकृति से प्रेम सभी को ,
करना भी - सिखाता योग ||
 
*लाखेरी ,जिला बूंदी (राज)
 

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