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मैं मजदूर हूँ
May 2, 2020 • विभोर अग्रवाल • कविता

*विभोर अग्रवाल

मैं मजदूर हूँ साहब
मजदूरी कर जीवकोपार्जन करता हूँ
अपना पेट काट काट कर
बच्चों को लालन पालन करता हूँ

करके दिनभर मेहनत
ना दिखे धूप, बरसात
ना करे जाड़ा आहत
बस मेहनत करके
परिवार चलाता हूँ
मैं मजदूर हूँ साहब

पढे़ मेरे भी बच्चे
ना करे काम एेसा
इस आशा में ये
भारी भरकम बोझा
मुझे लागे छोटा

चाहे खेत-खलिहान हो
चाहे हो कोई मकान
चाहे मनरेगा हो

चाहे बोझा ढोने का हो कोई काम
पेट के आगे सब लगे वीरान
मैं मजदूर हूँ साहब

मुझे सताती परिवार की चिन्ता
रैन बसेरा है मेरा कच्चा
फ़िर भी धन्यवाद देता हूँ तुझे परमात्मा
नहीं मँगवाता तू भिक्षा

धन्यवाद देता हूँ सरकार का
जो सदा रखती ध्यान
अपने मजदूर परिवार का
साल में एक दिन ही सही
आखिर याद किया जाता हूँ
एक मई को देश में
अपने दिवस के रुप में याद किया जाता हूँ
मैं मजदूर हूँ साहब
मजदूरी कर अपना जीवन चलाता हूँ।

*विभोर अग्रवाल
धामपुर जिला बिजनौर

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