ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
मैं गीत सुनाऊँ  सावन के 
July 25, 2020 • ✍️डॉ वर्षा सिंह • गीत/गजल

✍️डॉ वर्षा सिंह
घटा काली छाई ,बरखा रानी आई 
करे बूँद बूँद झंकार रे 
मैं गीत सुनाऊँ  सावन के 

सावन में तो छँटा अनोखी इंद्रधनुष दिखलाए,
मोर, पपिहा ,दादुर, चिड़िया, कोयल तान सुनाए,
रे सावन में तान सुनाए
चहुँ ओर है छाई ,देखो नई तरुणाई
किया धरती ने श्रृंगार रे 
मैं गीत सुनाऊँ सावन के 

गजरा ,चूड़ी, पायल पहनी और सजाई बिंदिया,
तीज में झूले झूले रही हैं, मिलकर सारी सखियाँ,
रे सावन में सारी सखियाँ
चल रही पुरबाई ,देखो मैं बलखाई 
सखी मिल के गायें मल्हार रे
मैं गीत  सुनाऊँ सावन के 

माह निगोड़ा सावन आया पिया नहीं पर आए
नाम पिया का लेकर मुझको नंदी भाभी सताए,
रे सावन भी आग लगाए
रुत मिलने की आई कहाँ गया हरजाई 
मैं थक गई राह निहार के
मैं गीत सुनाऊँ सावन के

*मुंबई

 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw