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मैं दीपक हूँ
November 17, 2019 • सुनील कुमार माथुर • समीक्षा/पुस्तक चर्चा

*सुनील कुमार माथुर*
          कवि श्याम सुन्दर सिखवाल ने अपने काव्य संग्रह मैं दीपक हूं  में दीपक के माध्यम से मानवीय जगत की गाथा को बडे ही सुन्दर भावों के साथ प्रस्तुत किया है  । कवि सिखवाल की चिंता बिल्कुल सही है । दीपक के माध्यम से उन्होंने मन की पीडा को पाठकों तक नि स्वार्थ भाव से, राष्ट्र के एक सजग प्रहरी की तरह पहुंचाने का प्रयास किया है और वे अपने प्रयास में काफी हद तक सफल भी हुए है ।
        सत्य की विजय में कवि का शाश्वत विश्वास है । कवि ने अपने काव्य संग्रह में महज एक सपना के माध्यम से बेरोजगारो की पीडा को उजागर किया वही दूसरी ओर अविचल प्रेम में विरागंना की चिंता को , निष्काम भाव में पति पत्नी के परस्पर प्रेम भाव को दर्शाया है , मां कविता में बच्चे की बाल क्रीडा देख वह अपनी प्रसव पीडा को भूल गयी । धन्य है ऐसी मां ।
          गरीबी के कोडे के माध्यम से कवि सिखवाल ने मंहगाई पर करारा व्यंग किया है । धरती पुत्र में किसान के परिश्रम के साथ ही साथ उसके मन में उठते हुए नाना प्रकार के विचारों को बडे ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है । दीपक के माध्यम से कवि ने गागर में सागर भरने का सराहनीय प्रयास किया है और आज के मानव की दशा को दर्शाया है कि वह किस तरह मोह माया के पीछे भाग रहा है और धर्म कर्म से वह दूर है । अगर हमे जीवन में कुछ पाना है तो अपने गुण व अवगुणो को प्रभु के चरणों में अर्पित कर देना चाहिए व ईश्वर में मन लगाकर मोक्ष की प्राप्ति के प्रयास करना चाहिए ।
     आज मानव अंहकार में आकर सब गलत कर रहा व पाप का घङा भर रहा है जिस दिन यह पाप का घङा फूट जायेगा उस दिन इस सृष्टि का विनाश हो जायेगा । कवि दीपक के माध्यम से सजग कर रहा है कि वह स्वंय जल कर समाज में ज्ञान का प्रकाश फैला रहा है । दीपक कह रहा है कि जलना मेरा धर्म है । मैं  सदैव प्रकाश फैलाता रहूंगा । मानव हृदय में जो अनादिकाल से विकार भरा है उनके अंधकार का पर्दा उठाकर उन्हें ज्ञानवान बनाने के लिए हर पल प्रयत्न करता रहूंगा । कवि दीपक के माध्यम से यह संदेश दे रहा है कि इस जीवन का मूल उद्देश्य समर्पण है । 
          कवि श्याम सुन्दर सिखवाल ने यह काव्य संग्रह अपने गुरु दीपचन्द सुथार को समर्पित किया है । कवि की सृष्टि व दृष्टि उदार है । उनकी सत्य की विजय में पूर्ण विश्वास है । पुस्तक की भूमिका राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ कवि व साहित्यकार डाॅ आईदानसिंह भाटी ने लिखी है । काव्य संग्रह के प्रकाशन में सिखवाल के परिजनों  , मित्रों  व साहित्य मनीषियों का योगदान भी सराहनीय रहा है । 
          कवि स्वंय एक अच्छे रचनाधर्मी है । उनकी लिखी गयी रचनाएँ दैनिक , मासिक , त्रैमासिक, स्मारिका व काव्य संकलनों में कई रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी है एवं राजस्थान, उतर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छतीसगढ साहित्य संस्थाओं द्धारा कई सम्मान व प्रशस्ति पत्र एवं उपखंड स्तर पर सम्मानित हो चुके है और अनेक संस्थाओं से जुडे रहे है ।
 
मैं दीपक हूं  ( काव्य संग्रह  )
रचियता  :  श्याम सुन्दर सिखवाल
प्रकाशक  : मीरा साहित्य संस्कृति एवं कला संस्थान, मेडता शहर जिला नागौर ( राजस्थान  ) मुद्रक  : जांगिड कम्प्यूटर्स जोधपुर  , सम्पर्क सूत्र  :  श्याम सुन्दर सिखवाल, कवि कुटीर, सिखवालो का मौहल्ला, खेजडे के पास , मेडता शहर जिला नागौर , राजस्थान  पिन 341510 कवर पृष्ठ  : सत्यनारायण जोशी  , मूल्य  :  150  रूपये  पृष्ठ  96
 
*सुनील कुमार माथुर 33 वर्धमान नगर शोभावतो की ढाणी खेमे का कुआ पालरोड जोधपुर राजस्थान पिन 342001
 

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