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महक
June 14, 2020 • विनय मोहन 'खारवन' • कहानी/लघुकथा

*विनय मोहन 'खारवन'
सरकारी स्कूल में सर्दी में कक्षाएं बाहर धूप में लग रही थी।सातवीं कक्षा में छोटे-छोटे बच्चे भी बाहर टाट पर बैठे थे ।उनकी कक्षा में एक नवनियुक्त लेडी टीचर बैठी थी ।कुछ बच्चे अपने प्रश्न लेकर मैडम के पास आने लगे। तो मैडम एकदम बोली ,"वहीं से पूछो ,बोलो क्या पूछना है"
मैं पास से गुजर रहा था। मैंने मैडम की बात सुनी तो बोल पड़ा क्या बात है मैडम बच्चों को क्यों डांट रहे हो । तो वो बोली," सर डांट नहीं रही,
बात यह है कि इन बच्चों में से मुझे बदबू आ रही है।"    मैं ठिठका व पूछा ,"मैडम बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है ।कौन सा परफ्यूम लगाया है।"
मैडम एकदम बोली," सर इंपोर्टेड है यह सेंट , पांच सौ का मंगवाया है।"
मैंने गंभीरता से कहा ,"मैडम यह पांच सौ  की महक भी इन बच्चों की ही देन है।"
मैडम समझ गई.। शर्म से गर्दन झुका ली। मैं आगे बढ़ गया।
*सेक्टर 18, जगाधरी, हरियाणा
 

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