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महाप्रज्ञ ! प्रज्ञता आपन पाई है ।
July 2, 2020 • धर्मेन्द्र बंम • कविता

*धर्मेन्द्र बंम

सत्य और अहिंसा की जो परछाई है 
महाप्रज्ञ  !  प्रज्ञता   आपने   पाई  है । 

भेद जीवन विज्ञान का तुमने बताया 
साधना  प्रेक्षाध्यान  की  समझाई  है । 

मार्ग व्यसन मुक्ति का हमें दिखलाया 
अहिंसा यात्रा  भी सुंदर   सुखदाई  है ।

निभाकर विश्व शांति में अहम भूमिका
शांति  पुरस्कार  की  शोभा  बढाई  है ।

जन कल्याण के लिए की उग्र पदयात्रा 
करुणा   तुम्हारे   रग  रग   में  समाई है ।

वीर संदेशों को जन जन तक फैलाकर
धर्म  पताका   हरपल   ही   फहराई  है ।

आगम  मंथन  करके  ओ गुरुवर तुमने 
जिन  धर्म  की  शान  खूब  ही बढाई है ।

वर्ष जन्म शताब्दी के पावन प्रसंग पर
बंम   की  वन्दना   तुमने   महकाई  है ।

*बिरलाग्राम, नागदा जंक्शन 
जिला - उज्जैन  ( म प्र )

 

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