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मद्रास विश्वविद्यालय में महाप्रज्ञ शताब्दी व्याख्यान
October 31, 2019 • शब्द प्रवाह • समाचार

ज्ञान की चेतना का जागरण होने पर जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान हो जाता है: डॉ. दिलीप धींग

चेन्नई। मद्रास विश्वविद्यालय के जैनविद्या विभाग तथा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ न्यास, टिंप्लिकेन के तत्वावधान में 30 अक्टूबर का विश्वविद्यालय में आचार्य तुलसी स्मृति व्याख्यान हुआ। अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र के निदेशक साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने 'आचार्य महाप्रज्ञ : जीवन और अवदान' विषय पर बोलते हुए कहा कि महाप्रज्ञ के जीवन-निर्माण में उनकी संसारपक्षीय माँ साध्वी बालूजी का बुनियादी योगदान रहा। माँ के बीज रूप संस्कारों का महाप्रज्ञ ने अपने पुरुषार्थ से खूब पल्लवित पुष्पित किया। आचार्य तुलसी के प्रति उनका समर्पण और विनय अद्भुत था। डॉ धींग ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ भगवान महावीर, जैनविद्या और प्राच्यविद्याओं के समर्थ भाष्यकार थे। उन्होने युग की भाषा में सिद्धान्तों की व्याख्याएँ कीं, अनेक शास्त्रीय गुत्थियों को सुलझाया तथा कई युग-समाधान दिये। प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान आदि उनके अवदान मौजूदा समस्याओ के निराकरण में उपयोगी हैं। महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी को ज्ञान चेतना वर्ष के रूप में मनाए जाने के संदर्भ में डॉ. धींग ने कहा कि ज्ञान चेतना सुख-दुःख में समत्व का संदेश देती है। वह कर्ता और भोक्ता के भाव का निषेध
करती है। ज्ञान की चेतना का जागरण होने पर जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान हो जाता है,साधना का मार्ग आसान हो जाता है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियदर्शना जैन ने डॉ. धींग के व्याख्यान पर आधारित आशुकविता सुनाकर सबका चकित कर दिया। उन्होने बताया कि विभाग में असांप्रदायिक दृष्टि से जैन दर्शन की पढ़ाई होती है। यहाँ जैन, जैनेतर, गृहस्थ और संत, सभी पढ़ रहे हैं, शोधकार्य कर रहे हैं। तेरापंथ न्यास, टिंप्लिकेन के अध्यक्ष गोतमचंद सेठिया ने बताया कि पिछले वर्ष इसी व्याख्यानमाला के अंतर्गत आचार्य महाश्रमण ने उद्बोधन दिया था। अब तक देश-विदेश के अनेक मनीषी इस व्याख्यानमाला में व्याख्यान दे चुके थे। विभाग की ओर से मुख्यवक्ता डॉ. धींग का सम्मान किया गया और न्यास की ओर से विद्यार्थियों को
महाप्रज्ञ साहित्य प्रदान किया गया। इस अवसर पर न्यास के मंत्री सुरेश संचेती, कोषाध्यक्ष वसंत मरलेचा, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष शांति दुधेड़िया, विमल चिप्पड़, धर्मचंद लूंकड़ सहित बड़ी संख्या में समाजजन भी उपस्थित थे। 

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