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मानवता का कर्ज चुकाने आ जाओ
April 27, 2020 • कैलाश सोनी सार्थक • गीत/गजल

*कैलाश सोनी सार्थक

मानवता का कर्ज चुकाने आ जाओ
दीन दुखी की जान  बचाने आ जाओ

दो रोटी की आग सताती है सबको 
आग यही तुम आज बुझाने आ जाओ

 दुख छ़ाया हर ओर यहाँ के लोगों पर 
किससे बोलूँ हाल बताने आ जाओ

आज वतन से रूठ गयी खुशियाँ सारी
अवसर आया उनको  मनाने आ जाओ

जान गवाँकर सेवा करते जो दर दर
उनकी खातिर शीश झुकाने आ जाओ

अपनेपन का स्वाद बढ़ा है आज यहाँ
गैर न समझो स्वाद चखाने आ जाओ

कोशिश करने से मिटता है अंधियारा  
सच मानो तो दीप जलाने आ जाओ

जीवन है तो सोनी दुनिया है अपनी
देश पुकारे उसको  बचाने आ जाओ

*कैलाश सोनी सार्थक, नागदा ज.

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