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मां तो मां होती है यारों
May 11, 2020 • प्रेम बजाज • कविता

*प्रेम बजाज

मां तुम बिन कोई नहीं लोरी सुनाता,
ना कोई चूरी कूट खिलाता 
कोई नहीं जो जाते समय ससुराल
चुपके से मुठ्ठी में नोट थमाता ।
 
कोई नहीं जो तकलीफ़ होने पर
लगा कर सीने से ढांढस बंधाता 
जब होती तबीयत ख़राब कोई नहीं
जो रात भर जाग मेरा माथा सहलाता ।
 
झूठ और सच में  फ़ासला क्या है
मां तुम बिन कोई नहीं समझाता 
भूखी हूं या भरा पेट है
तुम बिन कोई भी ना पूछने आता  ।
 
डर जाती हूं कभी जीवन के अंधेरों से
कोई ना हिम्मत देने आता 
खाती हूं रोज़ धोखे दुनियावी रिश्तों से
कोई ना दुनियादारी समझाता ।
 
कैसे जीऊं मां तुम बिन मैं
तेरा सपना भी तो नहीं अब आता 
मां  ग़र  तुम  बुलाओ तो 
ईश्वर भी धरती पे  उतर  आता ।
 
मां तो मां होती है यारों
मां जैसा दुनिया में कोई कहां बन पाता ।
 
*प्रेम बजाज, जगाधरी (यमुनानगर)
 

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