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मान ले रे इंसा
April 14, 2020 • विभोर अग्रवाल • कविता

*विभोर अग्रवाल

देखकर रोज बढ़ती संख्या
दिल मेरा घबराता जाये
कैसे समझाऊ तुम्हे
केवल घर रहना ही एक उपाय

मत भूलो पुरानी गलतियां
समय रहते सबक लिया जाये
अमेरिका ने की थी वो ही गलतियां
आज वो डूबा जाये

ऎ मेरे देश के इंसा
आज मान ले मेरी बात
कर ले लॉकडाउन का पालन
वरना बातों मे ही किया जायेगा याद


*विभोर अग्रवाल
धामपुर जिला बिजनौर

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