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लोकपर्व छठ
October 31, 2019 • मीरा सिंह मीरा • कविता

*मीरा सिंह "मीरा"*
जगत आत्मा,परमपिता
सूर्यदेव के प्रति
पूर्ण समर्पण का
नाम है छठ
प्राकृतिक आराधना का ,
प्रतीक है छठ
यह त्योहार ही नहीं
हमारी  लोकपरंपरा है
हमारी  अटूट आस्था है
श्रद्धा और विश्वास है
हर्ष और उल्लास है
खुशियाँ  खास है
अलौकिक एहसास है
अपने लोगों से
मिलने की ललक
अपनी माटी को
छू  पाने की हसरत
असुविधाओं से
लड़ने की एक जिद
झंझावतों के बीच
जिंदा रहने की उम्मीद
अमीर गरीब के
फर्क को मिटाता
सामूहिकता का
महत्व बतलाता
पर्यावरण के अनुकूल
वस्तुओं का उपयोग
मन रहे स्वस्थ
काया रहे निरोग
ना कोई मंत्र
नहीं कोई ग्रंथ
ना कोई पंडित
नहीं कोई प्रतिमा
बहुत  अद्भुत है
छठी मईया की महिमा ।

*मीरा सिंह "मीरा",डुमराँव,  जिला- बक्सर बिहार- 802119 

 

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