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लॉक खुलने के बाद मौकापरस्तों पर अब देवत्व की नजर 
June 12, 2020 • सुशील कुमार 'नवीन' • व्यंग्य

*सुशील कुमार 'नवीन'

ढाई माह से भी अधिक समय तक लॉक रहे देवत्व अब अपना विराटस्वरूप दिखाने के मूड में है। आमजन को छोड़ पहले व्यक्ति विशेष को चुन-चुन कर निशाना बनाने की योजना है। कारण भाई आप सबके साथ उन सब से नाराजगी है। जिन्होंने देवत्व को इतने दिनों हवा तक न लगने दी। खुद तो छूट के नाम पर तफरी करते रहे। सबके पास राहत सामग्री पहुंची। हवाई जहाज तक की यात्रा करवाई। स्पेशल ट्रेन चलवाईं। बसें भिजवाईं। पर देवत्व की किसी नेता ने, सोशल वर्कर ने सुध नहीं ली। किसी ने यह तक नहीं कहा कि भगवन! सेवा बताओ। क्या लाकर प्रस्तुत करूं। पहले तो रोज मोदक,बर्फी-पेड़ा, मिश्री, मखाने और भी न जाने क्या क्या मिठाई लाकर भोग लगवाते थे। रसभरी मिठाइयां खाने का आदी किया हुआ था। लोकडाउन होते ही मिठाइयां पहुंचाना तो दूर की बात  गेट पर बड़ा सा ताला और ठोक दिया। कुछ परमभक्तों ने नजदीक आने का प्रयास भी किया तो हमारे खाकी वाले भाइयों ने लाठियां दिखा दी। ये तो भला हो रजिस्टर्ड सेवकों का कि वे सुबह शाम आरती पूजन के नाम पर उनसे मिल वक्त फिर लौटने का हौसला बढ़ाते रहे। 
अब कपाट खुल गए है तो मानो सांसें लौट आई हैं। लोकडाउन में वीरान रहने वाले देवालयों पर रौनक दिखने लगी हैं। अब जलवा दिखाने की बारी देवत्व की है। सो जिसने इनके साथ गैरों सा व्यवहार किया था। और जिन्होंने इस आपदा के समय को व्यापार के रूप में प्रयोग किया। मौकापरस्ती की। सबको एक एक कर लपेटने का प्रयास होगा।फिलहाल देवालयों में मौके को भुनाने वालों की संख्या ही ज्यादा दिख रही है। साम दाम दंड भेद की नीति से वो अपने कृत्य पर क्षमाप्रार्थी बन देवत्व को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं।हालांकि देवत्व अभी क्षमा करने के मूड में नहीं है। फिलहाल व्यक्तिविशेषों पर भौहें तनी हुई है। परिणाम क्या रहेगा। पता नहीं। पर आने वाला समय देवत्व के कुपित रूप प्रदर्शन का है। ऐसे में दिल्ली वाले लाला जी ने तो समय को भांप पहले ही अपने आपको क्वारण्टाइन कर लिया है। क्योंकि उन्हें पता है कि नाम पता पूछेंगे किसी और का, और विरोधी उनकी तरफ इशारा कर देंगे।बंगाल वाली दीदी के बाद वही तो सबसे बड़ा गोल होते हैं। सुना है एमपी वाले राजा साहब भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। उन पर तो वैसे भी देवत्व सबसे ज्यादा नाराज बताए गए हैं। कारण तो उनके साथ हम सबको भान है। यदि वो वहां उठापटक नहीं करते तो मोटा भाई का ध्यान सिर्फ कोरोना पर ही होता। सुनने में आया है देवत्व की गृहाधिपति मोटा भाई से भी नाराजगी कम नहीं है। वजह भी वाजिब है। कह रहे हैं लोकडाउन कर तुम्हारा मन नहीं भरा क्या। अब तो कम से कम भक्तों को मेरे पास आने का पूरा मौका दे देते। हाथ धोकर आना तो चलो सही था। सेनिटाइजर का यहां क्या काम। ऊपर से न भक्त मेरे लिए कुछ ला पा रहे हैं और न मैं उन्हें कुछ दे पा रहा हूँ। ऐसे में और ढिलाई देनी ही पड़ेगी। नाराजगी प्रधानसेवक जी से भी है। कह रहे है कि आपके एक आह्वान पर भक्तों ने सिर्फ मेरी ही सेवा में प्रयोग होने वाले वाद्ययंत्रों को खूब बजाया। फिर उन्हीं भक्तों को मुझसे दूर कर दिया। ये तो सरासर नाइंसाफी ही हुई।
सुना है उन लोगों से भी देवत्व नाराज है जिन्होंने उनके भक्तों और बेबस लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया है। यही नहीं ऐसे लोगों की भी लिस्ट बनाई जा रही है जिन्होंने आपदा का फायदा उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। बेबस जरूरतमंद लोगों पर खर्च किया एक रुपया और दिखाया एक हजार रुपया। जिन्होंने गद्दों चद्दरों का एक दिन इतना किराया दिखाया जितने में वे नए आ सकते थे। खाना खिलाया 20 रुपये का खर्चे में 200 रुपये की प्लेट दिखाई। उन चिकित्सा सेवा में जुड़े लोगों को जिन्होंने अपनी ओपीडी भी 5 गुना तक बढ़ा दी। कोरोना का भय दिखाकर लोगों के महंगे-महंगे टेस्ट करवाये। बाहर ओपीडी बन्द जरूर दिखाई पर पिछले दरवाजे से आपातकालीन फीस लेने में कोई देरी नहीं की।
इसलिए ऐसे लोगों को अभी भी सलाह है कि वे समय रहते अपने आपको सुधार लें। आपदा को अवसर न बनाएं। सहयोग की भावना पैदा कर समाजहित में जुट जाएं। देवत्व करूणानिधान है। दुष्कृत्यों को क्षमा कर देंगे।
*हिसार
 

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