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लौह पुरुष
October 31, 2019 • सुरेश शर्मा • कविता


*सुरेश शर्मा*
किसान  के घर पैदा  होकर भी,
बहुत बड़े  बैरिस्टर कहलाएं वो ;
562 प्रांतों को एक सूत्र मे पिरोकर,
एकता की मिसाल  बनाएं वो ।
तब जाकर  युग- पुरुष  कहलाएं वो।

सरदार बल्लभ भाई  पटेल जी की,
पदचिन्हों पर  चलकर  हमसब ;
चलो एकता  की दौड़  लगाएं  हम ।
उनकी सु-कृतियों  की याद  करके ,
उस लौह -पुरूष के  समक्ष सर झुकाएं हम।

एक  दिन  हम मौन रहकर ,
शान्ति  का दूत कहलाएं हम ;
उस युगपूरूष के  नाम मे ।
जिन्होंने सिखाया हमे हमेशा ,
एकता को लक्ष्य  बनाए  हम ।

युग हमेशा  याद रखेगा उनकी,
हमे एकता  मे पिरोने  की प्रचेस्टा को;
आओ सत- सत हम नमन करे उनको ।
और हमसब मिलकर आगे बढ़ाए उनकी,
महा- महान  इस कार्य शैली  को।

शाम, दाम,दंड ,भेद को आपनाकर  ,
नयी मिशाल  कायम करके ;
वो देश  को आगे  बढाए थें ।
हमारे  हिन्दुस्तान को नई  दिशा  देकर
तब जाकर  लौह  पुरुष  कहलाए  थें ।

*सुरेश शर्मा,नूनमाटी,गुवाहाटी (आसाम )मो08811033471

 

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