ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
लाकडाउन की चुनौतियां ही भविष्य की उम्मीद हैं
May 31, 2020 • सुषमा दीक्षित शुक्ला

कोरोनावायरस के चलते दुनिया को भविष्य में आने वाले हर खतरे से आगाह कराया है जिसके लिए हर वक्त तैयार रहना होगा ।ऐसे खतरों से निपटने के लिए वर्तमान में तैयारियां भी बड़े पैमाने पर करनी होंगी ।इसने पूरी दुनिया के कदमों को  तो रोका लेकिन साथ ही विभिन्न देश एक दूसरे की मदद को भी आगे आए और एक दूसरे की मदद की ।  आर्थिक चपत  तो  कोरोना ने वाकई लगाई लेकिन मानवता को बचाने का लक्ष्य सभी देशों को एक साथ लेकर आया ।अर्थव्यवस्था में मंदी की परवाह न करते हुए सभी ने जरूरी कदम पहले उठाए ।इसकी  वजह से जो भविष्य  मे बदलाव के संकेत दिखाई दिए हैं वह काफी अहम है ।भविष्य में इन्हें नकारना संभव नहीं होगा ।ऐसे कई बड़े बदलाव भविष्य में होंगे जो दुनिया को नई दिशा देंगे और तरक्की की राह पर आगे लाएंगे। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय  बैठको के लिए अब बड़े तामझाम की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि यह सब वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगा इससे तमाम प्रकार के फालतू खर्चे बचेंगे ।कोरोना ने लोगों को घर में बैठकर काम करने की जो सीख दी इसे भविष्य में व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
चीन ,पाक ,भारत आदि देशों में सबसे अहम की जो सामने आई वह ,स्वच्छता ,कोरोनावायरस होने से साफ जलवायु युक्त वातावरण मिला है जो बेहतर स्वास्थ्य देकर अन्य कई बीमारियों से बचाव करेगा ।लोगों ने महसूस किया है कि बेवजह सड़कों पर निकलना एवं वाहनों को निकालना ठीक नहीं, इससे दुर्घटनाओं व अपराध दर में भी कमी रहेगी ।कोरोना के लॉक डाउन मे लोगों को घरों या अपनों  का महत्व  भी दिखा दिया है परिवार व पड़ोस को महत्व  देना सिखा दिया है । पहले सरकार  लोगों द्वारा प्रदूषण मुक्ति  में भागीदारी चाहती थी तो लोग काफी तूल देते थे और  अब खुद ही तैयार होंगे एवं सदैव साफ सफाई रखेगे ।
सामाजिक जगहो पर शारीरिक टच की ओट मे महिलाओं से अभद्रता पूर्ण व्यवहार किया जाता था जो कि सोशल डिस्टेंस के चलते भविष्य में समाप्त हो जाएगा ,क्योंकि अब  दूर से ही नमस्कार से काम  चलाना होगा। नमस्कार पद्धति तो पूरा विश्व ही अपना रहा है जो कि भारत की प्राचीनतम परंपरा रही है ।अब आगे भी  यही रहेगी  ।इन चुनौतियों पर सुंदर भविष्य की दीवार खड़ी है ।लोगों ने कम खर्चे में  ही अपना घरेलू खर्च उठाना शुरू कर दिया है।फिजूलखर्ची  बंद  हो गईं ।  इस लॉक  डाउन से मानवतावादी दृष्टिकोण, स्वदेश प्रेम ,स्वच्छता ,परोपकार , भाईचारा ,मैत्री ,सहयोग ,परमार्थ आदि मानवीय गुणों को विकसित कर दिया है जो भविष्य मे काम  आयेगा । योग ,प्रार्थना ,सदाचार ,दयाभाव , घरेलू कामो मे आत्मनिर्भरता ,रचनात्मकता ,सृजनात्मकता,आदि मानवीय गुणों को निखारा है ।
*सुषमा दीक्षित शुक्ला, लखनऊ

इस विशेष कॉलम पर और विचार पढ़ने के लिए देखे- लॉकडाउन से सीख 

अपने विचार आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.comयूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw