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लाॅक डाउन : स्त्री जीवन
April 13, 2020 • पुष्पा सिंघी • कविता

  *पुष्पा सिंघी

लाॅक डाउन
कहाँ नया है
स्त्री-जीवन में....
लक्ष्मणरेखा
बनी जन्म के साथ
घर -आँगन में...!!

उम्र के
किस पड़ाव में
नहीं थीं बंदिशें....
बारहमास
उमड़ती-घुमड़ती
रहीं थीं बारिशें...!!

रूढ़ियों की
मूढ़ जंज़ीरें सघन
टूटी कब भला....
सदियों से
सही अकथ यातना
दौर यही चला...!!

सुनो तुम ,
क्या होता है लाॅक डाउन
जान गये ना....
संवेदना-पुष्प
विकसे अंतस में
अब कुछ न कहना...!!

*पुष्पा सिंघी , कटक

 

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