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क्या प्रदुषण दोयम दर्ज़े की समस्या हैं
November 22, 2019 • डॉ अरविन्द जैन • लेख

*डॉ अरविन्द जैन*

एक तरफ राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में प्रदूषण से लोगों का सांस लेना मुहाल हो रहा है, दूसरी तरफ राजनेताओं के लिए यह सियासी हिसाब चुकता करने का बहाना बन गया है। प्रदूषण की आड़ लेकर वे अपने विरोधियों को चित करने में जुटे हैं। नतीजा यह कि इस बीमारी का इलाज खोजना तो दूर, इस पर ढंग की बात भी नहीं हो पा रही।
लोकतांत्रिक राजनीति में किसी मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष का एक-दूसरे की आलोचना करना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मकसद कोई रास्ता खोलना होता है। मंगलवार को लोकसभा में प्रदूषण पर हुई बहस तो सिर्फ एक-दूसरे की टांग खिचाई करने की कवायद भर साबित हुई।
आम जनता के जीवन से सीधे जुड़े इस मुद्दे का भी हश्र अगर यही होना है तो फिर इस व्यवस्था में दूरदृष्टि के लिए कितनी गुंजाइश खोजी जाए? चर्चा में बीजेपी का सारा जोर दिल्ली की केजरीवाल सरकार को घेरने पर था। हालत यह हुई कि मौजूदा सरकार का विरोध करने के क्रम में बीजेपी सांसदों को कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार का गुणगान करने में भी कोई समस्या नहीं हुई। मामले का दूसरा पहलू यह रहा कि दिल्ली के कुछ सांसदों ने इस चर्चा में शामिल होना भी जरूरी नहीं समझा। हमारे सांसद प्रदूषण को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा पिछले हफ्ते ही मिल गया था, जब इस मसले पर बुलाई गई संसद की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में 25 में से कुल 4 सदस्य पहुंचे और अधिकतर एमपी नदारद रहे।
बीजेपी की सांसद हेमा मालिनी ने संसद में प्रदूषण पर चली बहस को लेकर सांसदों के अनमनेपन पर कहा कि संभव है बाकी सांसदों के क्षेत्र में प्रदूषण कम होने के कारण वे उपस्थित नहीं हुए और दिल्ली में स्थिति ज्यादा गंभीर है इसलिए यहां के सांसदों को आना पड़ा। दरअसल प्रदूषण को लेकर देश के समूचे राजनीतिक नेतृत्व का रवैया इसी हल्केपन का शिकार है। मीडिया या जुडिशरी से इस मामले में दबाव बढ़ता है तो आनन-फानन कुछ उपाय किए जाते हैं, फिर सब इसे भूल जाते हैं। निश्चित और स्थायी उपाय के बारे में सोचा तक नहीं जाता। लेकिन ध्यान रहे, चुनौती सिर्फ कुछ इलाकों की आबोहवा ठीक करने की नहीं है
जलवायु परिवर्तन का भयावह संकट हमारे सामने खड़ा है, जिससे निपटने के लिए कई देशों में युद्ध स्तर पर अभियान शुरू हो गया है। लेकिन हमारे लिए यह आज भी टाइमपास है और हमारे नेतागण इसे हंसी-मजाक में उड़ा देना चाहते हैं। जिन लोगों को लगता है कि प्रदूषण सिर्फ उत्तर भारत की समस्या है, उन्हें चेन्नै और केरल की बाढ़ को याद करना चाहिए और महाराष्ट्र के सूखे के बारे में भी सोचना चाहिए। मौसमों के अत्याचार से देश का कोई न कोई हिस्सा हर साल तबाह हो रहा है। हमें पर्यावरण के प्रश्न को व्यापकता में लेकर नीतिगत स्तर पर कुछ बड़े फैसले लेने होंगे, जो तभी हो पाएगा जब सभी जन प्रतिनिधि क्षुद्र राजनीति छोड़कर इस पर एकजुट हों।
 प्रदूषण न सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर रहा है, बल्कि इसका असर लोगों की लाइफ लाइन भी पर भी पड़ रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय की शोध संस्था 'एपिक' की ओर से जारी एयर क्वॉलिटी लाइफ इंडेक्स के मुताबिक प्रदूषण के चलते लोगों की औसत उम्र में 7 साल तक की कमी आ जाती है। वहीं, प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना रहे तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। ऐसे में कुछ आसान उपाय अपनाकर पलूशन के बुरे असर से काफी हद तक बचा जा सकता है और लंबे समय तक सेहतमंद जीवन भी जी सकते हैं। कैसे, यहां जानें...
घर में भी लगाएं मास्क
स्मॉग में घुले जहरीले तत्व सांस के साथ फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचकर वहां चिपक जाते हैं। इससे अस्थमा, टीबी और कैंसर जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं। इस तरह के प्रभावों से बचने के लिए सिर्फ बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी मास्क लगाकर रहें। मॉर्निंग और इवनिंग वॉक से परहेज करें और घर पर हल्का व्यायाम करें।
दिल का रखें खास ख्याल
जहरीले तत्व सांस के जरिए शरीर में जाकर खून में मिल जाते हैं और रक्त को संक्रमित करते हैं जिससे दिल संबंधी कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इनसे बचने के लिए खानपान में बदलाव जरूरी है। घर पर ही खाना खाएं और कसरत करें। खाना भी हल्का खाना चाहिए और औसत से ज्यादा पानी पीना चाहिए।
नीम और तुलसी है रामबाण की तरह कि स्मॉग के प्रभाव को कम करने के लिए कई तरह के काढ़े आयुर्वेद में हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाते हैं।  स्मॉग के प्रभाव को कम करने के लिए तुलसी सत, नीम सत लिया जा सकता है। गिलोय, तुलसी, नीम, काली मिर्च, मुलैठी, आमा हल्दी, छोटी पीपल और पुराने गुड़ का काढ़ा बनाकर उसका सेवन करने से भी स्मॉग के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। नाक को गीले रूमाल से ढककर रखें। यह हानिकारक तत्वों को रोक लेता है।
योग शरीर से निकालेगा हानिकारक तत्व
शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने के लिए जलनेती, कपालभाती, धनुरासन, चक्रासन और उष्ट्रासन काफी सहायक हैं। ये आसन श्वासन तंत्र और हृदय को हेल्दी बनाते हैं। हानिकारक तत्वों के शरीर से निकलने से स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्मॉग के दौरान व्यायाम या आसन घर में ही करें, बाहर न निकलें।
गुड़ से करें गले की गंदगी को साफ
प्रदूषण के चलते गले में सबसे अधिक धूल के कण जमा हो जाते हैं। इससे गले में परेशानी हो जाती है। ऐसे में रोज खाने के बाद गुड़ का इस्तेमाल करें। इसके अलावा मुलेठी भी चबा सकते हैं। साथ ही गर्म पानी में कुछ बूंदें नींबू की डालकर पी सकते हैं। 2 आंवले के रस में शहद मिलाकर भी ले सकते हैं। दिन में संतरे का सेवन कर सकते हैं।
श्वसन प्रणाली को ऐसे रखें मजबूत
1. रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच च्यवनप्राश लें। ये रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।2. सुबह के समय तुलसी के तीन-चार पते चबाकर खाएं।3. एक लीटर पानी में थोड़ा सा अदरक, 2-3 लौंग, 3-4 काली मिर्च, तुलसी के 4-5 पत्ते और एक चम्मच सौंफ मिलाकर काढ़ा बना लें। सुबह से शाम तक थोड़ी-थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करें।4. नाक को साफ रखने के लिए सोते समय सरसों, तिल या अणु तेल की कुछ बूंदे नाक में डाल कर सोएं।5. नीम की पत्तियों से रोगों से लड़ने की क्षमता मिलती है। ऐसे में इन दिनों में रोजाना सुबह के समय 4-5 नीम की पत्ती खा सकते हैं। 6. इसके अलावा लहसुन की एक कली रोज सुबह खाली पेट ले सकते हैं। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
बरतें ये सावधानियां
ज्यादा स्मॉग के दौरान घर में ही व्यायाम और योग आसन करें।-कभी भी खाली पेट सुबह की सैर पर न जाएं, कुछ न कुछ जरूर खा लें।-पार्क में देख लें कि ओस पड़ी है या नहीं, ओस पड़ने के बाद ही टहलें, क्योंकि यह प्रदूषण की एक परत खत्म कर देती है।-डायट में सुधार करें, हेल्दी डायट लें और दिनभर में खूब पानी पिएं, इससे हानिकारक तत्वों के शरीर से बाहर निकलने में मदद मिलेगी।-अपने घर और दफ्तर के आसपास कूड़ा, कचरा और धूल नहीं फैलने दें।
घुले जहरीले तत्व सांस के साथ फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचकर वहां चिपक जाते हैं। इससे अस्थमा, टीबी और कैंसर जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं। इस तरह के प्रभावों से बचने के लिए सिर्फ बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी मास्क लगाकर रहें। मॉर्निंग और इवनिंग वॉक से परहेज करें और घर पर हल्का व्यायाम करें।
इसके अलावा हम कोई ऐसा काम न करे जिससे प्रकति के पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव  न पड़े और प्रत्येक का कर्तव्य हैं इस महायज्ञ में  सबकी महत्वपूर्ण भूमिका हैं उसे निभाए।


*डॉ अरविन्द प्रेमचंद जैन  भोपाल मोबाइल  09425006753

 
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