ALL लॉकडाउन से सीख कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
क्षितिज
May 31, 2020 • राजीव डोगरा 'विमल' • कविता
*राजीव डोगरा 'विमल'
जीवन क्षितिज के अंत में 
मिलूंगा फिर से तुमको,
देखना तुम
मैं कितना बदल सा गया हूं
मिलकर तुमको।
 
जीवन क्षितिज के अंतिम 
छोर में देखना
मेरे ढलते जीवन की 
परछाई को,
कितनी बिखर सी गई है
मिलकर तुमको।
 
जीवन क्षितिज के अंत में 
देखना मेरी 
डगमगाती सांसों को,
कितना टूट सी गई है 
मिलकर तुमको।
*कांगड़ा हिमाचल प्रदेश 
 
साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखे- http://shashwatsrijan.comयूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw