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कृषकों की मरती हालत का उपचार है आत्मनिर्भर भारत
June 6, 2020 • हर्षद भंडारी • लेख

*हर्षद भंडारी 

प्राचिनकाल से हमारा देश कृषि प्रधान देश रहा है और मां अन्नपूर्णा के प्रति हमारे देशवासियों की असीम श्रद्धा से हम खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी हैं, परंतु अब जनसंख्या का घनत्व बढ़ता जा रहा है। कृषि क्षेत्र का दायरा घटता जा रहा है उस समय देश को उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु अनेक प्रयास की आवश्यकता है वर्तमान में नई नई तकनीकी आधुनिक वैज्ञानिकरण का पूर्ण लाभ हमारा किसान नहीं उठा पा रहा है। कुछ छोटे किसान संपूर्ण ज्ञान नहीं होने के कारण अपने आप को मृत्यु को चुनने का दरवाजा खटखटा देते हैं।परंतु वर्तमान में कोरोना जैसी महामारी के बाद भी जब संपूर्ण विश्व में डर का माहौल था यह भारत के लिए गौरव की बात है कि हमारे पास खाद्यान्न वस्तुओं का भरपूर भंडारण था, फिर भी वर्तमान मे आज भी शासन के पास किसानों की उपज को सुरक्षित रखने हेतु पर्याप्त गोदाम व्यवस्था नहीं है। इसी कारण हमारे किसानों की मेहनत आज भी खुले में पड़ी हुई है और वर्षा के बादल उपज पर मंडराने लगे हैं। आज सरकार को प्रत्येक गांव में भंडारण की विशेष योजना लाने की जरूरत है, किसान अपना माल, व्यापारी अपनी क्रय उपज अपने गांव क्षेत्र में  शासकीय व्यवस्था अथवा  निजी वेयर हाउस में भंडारण करे कुछ इस तरह के वेयरहाउस निर्मित हो जहां पर कम परिवहन खर्च के साथ भंडारण की उचित तकनीकी का प्रयोग कर भंडारण किया जा सके प्रत्येक गांव प्रत्येक जिले स्तर पर  वेयरहाउस बनाने हेतु किसानों को प्रेरित किया जाए। वेयरहाउस व्यवसाय को नई पहचान दी जाए। उन्हें शासन की ओर से मदद दी जाए, ताकि हमारे किसान भाई का एक कण भी व्यर्थ न जाए साथ ही किसान भाईयो को उच्च गुणवत्ता की खेती, आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां अन्य फल सब्जी आदि की खेती को करने हेतु सरकार को अपने कदम बढ़ाना चाहिए हर जिले में आयुर्वेदिक औषधि निर्माण का कारखाना विकसित कर शासन को रोजगार एवं कृषि उत्पाद को विक्रय कर उसे प्रसंस्करण  की व्यवस्था करनी चाहिए वर्तमान में आयुर्वेद के लाभ जिस तरह से बढ़ रहे हैं सम्पूर्ण विश्व मे इसकी असीमित मांग को सिर्फ भारत के किसान श्रमिक ओर युवा उधमी ही पूरी कर सकते है और किसानों की मरती हालत का आयुर्वेदिक उपचार भी सिद्ध हो सकता है ।

*राजगढ़ ( धार )

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