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कोरोना पर वार
March 19, 2020 • प्रो.शरद नारायण खरे • कविता

प्रो.शरद नारायण खरे


कोरोना पर वार आज तो भैया जी,
उसका तो संहार आज तो भैया जी। 

घबराने से कुछ भी हासिल ना होगा,
ज़ोरदार जयकार आज तो भैया जी ।

साफ-सफाई को मानो सबसे बढ़कर,
वह तो है उपहार आज तो भैया जी ।

चीनी मानवता के दुश्मन बन बैठे,
दहल रहा संसार आज तो भैया जी ।

सब कुछ अस्तव्यस्त अब तो इस दुनिया में,
जनजीवन पर मार आज तो भैया जी ।

नहीं गीत,न पल मनभावन,न ही चैनो अमन रहा,
बंद ह्रदय-झंकार आज तो भैया जी ।

मन के हारे हार मिले,और मन के जीते जीत,
मानें ना हम हार आज तो भैया जी ।

चीन बहुत ही वहशी है यह सिध्द हुआ,
हो गाली-बौछार आज तो भैया जी ।

आशाओं का दामन थामो,ज़िन्दाबाद,
साहस के आसार आज तो भैया जी ।

वक़्त चुनौती लेकर आया आज "शरद",
कर लो पैनी धार आज तो भैया जी ।
 

*प्रो.शरद नारायण खरे, मंडला(मप्र)

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