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कोरोना पर मेरा प्रयास
May 19, 2020 • नारायणी तिवारी • कविता

*नारायणी तिवारी

जन-जन में यह फैल गया है , 
जन ही जन से अलग हुआ है..
घनघोर बीमारी का तांडव तो ,
इस पूरे जगत में फैला हुआ है ||  |1|

अपनों से मानव ही मिलने को ,
आस कर रहा, प्रयास कर रहा..
घर ही घर में मानव छुपा है ,
कोरोना विश्व में फैला हुआ है ||  |2|

कार्य प्रणाली रुक सी गई है ,
काम काज सब छूट गया है..
घर में बंद बैठा है मानव और ,
पतन विश्व में फैला हुआ है  ||  |3|

मानव को मानव से मिलना है ,
तो ये कर्तव्य भी निभाना होगा..
घर में रहकर ही कुछ दिनतक ,
कोरोना को भी हराना होगा ||  |4|

स्वच्छता की लेकरके प्रतिज्ञा ,
स्वयं को सीमित करना आसान है..
SUMANK के कोड को लेकर ,
हाथ धोना एक उचित समाधान है ||  |5|

जब भी बाहर निकलना पडे़ तो ,
मास्क, सेनेटाइज का प्रयोग करो..
प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाएगी,
अगर वनस्पति का उपभोग करो ||  |6|

LOCKDOWN का पालन करके ,
एक अनुकूल नागरिक बनना है..
सच्चा देशवासी वही होता है ,
जो प्रकृति-देश की शान रखता है ||  |7|

ये मानवता की कठिन घड़ी है ,
कितना परोपकारी बन सकते हो..
अपने को सीमित रखकर भी ,
समाज में आशा जगा सकते हो ||  |8|

करो प्रार्थना बस यही कामना ,
कोरोना वैक्सीन सफल हो जाए..
मिट जाए यह संताप सभी का ,
महामारी की भी मार हो जाए ||  |9|

देश हमारा भरपूर संस्कृति ,
बस स्वच्छता को अपनाना है..
बाहर से आकर कही कभी भी ,
बस पैर धोकर अंदर जाना है ||  |10|

कर सकते हो एक और कर्म भी ,
आस पास की भूख की तुम..
तृप्ति संतुष्टि बन सकते हो |
अन्न दान और पानी पिलाकर ,
इस तपन में वृष्टि कर सकते हो ||  |11|

मैं सुरक्षित आप सुरक्षित,
समाज सुरक्षित देश सुरक्षित..
जन जन को बस यही समझाएंगे |
शांति से लड़कर इस युद्ध में ,
हम ले आएंगे एक देश फलित  ||  |12|

हाथों को स्वच्छ बनाने हेतु डाक्टर्स द्वारा बनाया मूलमंत्र SUMANK* :  (सीधा, उल्टा, मुठ्ठी, अंगूठा, नाखून, कलाई..) 

 

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