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कोरोना काल में
June 10, 2020 • डॉ.अनिता सिंह • कविता

*डॉ.अनिता सिंह
हर तरफ सहमी सी खामोशी
कभी डराया तो कभी अस्थिर बनाया
पर सुकून का फल पाया है मैंने
इस करोना काल में।

तब समय के पीछे मैं भागती थी,
अब समय को मैंने अपनी हसरतों से
सजाया है इस कोरोना काल में।

इस लाॅकडाउन में मैंने समय से दोस्ती कर ली है,
वह पल जो मुझे भाव नहीं देते थे
अब मुस्कुराते हैं मेरे समक्ष
इस कोरोना काल।

व्यस्तता में अपनों से बात नहीं कर पाती थी,
अब हर दिन माँ की ममता में डूबती
इतराती हूँ इस कोरोना काल में।

ख्वाहिशें अधूरी रह जाती थी बच्चों की ,
अब स्नेह से सजाया है घर की बगिया को
इस कोरोना काल में।

कभी पढ़ती हूँ ,कुछ सृजन भी करती हूँ ,
ख्वाबों की दुनिया में इत्मीनान से गुजरती हूँ
इस कोरोना काल में।

परिवार के साथ खुद की भी देखभाल करती हूँ,
सज संवर कर ख्वाबों को नया आयाम देती हूँ
इस कोरोना काल में।

माना कि सफर मुश्किल है दहशत में है दुनिया,
पर मैंने अपने अंतर्मन में आत्मविश्वास जगाया है
इस कोरोना काल में ।

यह वक्त की आंधी है
एक दिन तो ठहर जाना है इसको ,
नहीं हम सबको डगमगाना है
इस कोरोना काल में।
*बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
 

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