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कोरोना जैसी महामारियों से सिर्फ शाकाहार बचाएगा
March 4, 2020 • डॉ. दिलीप धींग • लेख


*डॉ. दिलीप धींग 
मांसाहार ने मानवता पर जो कहर बरपाया है, वह संभवतः किसी और चीज ने नहीं। धरती माँ के करुणामय आँचल से संवेदना, मानवीयता, स्वच्छ पर्यावरण, सहअस्तित्व, शान्ति और समृद्धि को छीनने वाले मांसाहार ने मानव के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए कई बीमारियाँ और महामारियाँ पैदा की है। किसी समय गौमांस खाने वालों ने ‘मेडकाऊ’ का हौवा मचाया और हजारों गायों को मौत के घाट उतार दिया। बर्डफ्लू के नाम पर लाखों मुर्गे-मुर्गियों और चूजों का कत्ल कर दिया जाता है। 
स्वाइन फ्लू (सुअर ज्वर) हर साल अपनी दस्तक देता रहता है और कितने ही लोगों को बीमार या काल कवलित कर लेता है। वर्ष 2017 में फैले स्वाइनफ्लू से देशभर में लगभग डेढ़ हजार लोगों के मरने की खबरें आई और लगभग पच्चीस हजार लोग इस रोग से संक्रमित हो गये थे। राजस्थान में तो एक विधायक को स्वाइनफ्लू से काल का ग्रास होना पड़ा और एक अन्य विधायक तथा न्यायाधीश में स्वाइनफ्लू के लक्षण पाए गये। मार्च-2018 के राजस्थान के समाचार-पत्रों के अनुसार सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर ने राजस्थान के राज्यपाल को भी स्वाइनफ्लू पोजिटिव बताया था। अप्रेल-2018 में उदयपुर स्थित आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के चिकित्सकों में भी स्वाइन फ्लू फैलने की खबर आई। ऐसी दुःखद घटनाओं के बाद प्रदेश और देश में स्वाइनफ्लू के लिए चिकित्सा-व्यवस्था और अधिक कारगर करने के निर्देश दिये गये थे। 
और अब कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण पूरी दुनिया में दहशत है। मार्च-2020 के चौथे दिन तक इस रोग से 93 हजार से अधिक लोग संक्रमित पाये गये हैं तथा 3200 से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। एक आशाजनक तथ्य यह भी है कि लगभग 51 हजार संक्रमित व्यक्ति ठीक भी हुए हैं। लेकिन लगभग 40 हजार संक्रमितों में-से 7 हजार की हालत गंभीर बनी हुई है। भारत में कोरोना के संकेत मात्र से हड़कंप मच गया है। कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में व्यक्तियों का आवागमन एवं वस्तुओं व सेवाओं का लेन-देन प्रतिबंधित, नियंत्रित और धीमा हो गया है। इससे भारत सहित कई देशों की, यानी दुनिया की अर्थव्यवस्था भारी धक्का लगा है। अब तक अरबों-खरबों का व्यापार प्रभावित हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.), दोनों चिंतित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तो कोरोना महामारी को आतंकवाद से भी अधिक भयानक खतरा बताया है। 
बर्डफ्लू, स्वाइनफ्लू, निपाह, कोरोना आदि बीमारियाँ महामारी के रूप में तेजी से फैलती हैं। कोरोना वायरस के साथ स्वाइन फ्लू के फिर सक्रिय होने की खबरें भी आई हैं। इससे पता चलता है कि ये ‘मित्र बीमारियाँ’ हैं। इन बीमारियों के अनेक कारण हो सकते हैं, लेकिन मुख्य कारण हैं- मांसाहार, बूचड़खाने और प्राणियों की बढ़ती हत्याएँ। ये बीमारियाँ मांसाहार करने वालों को हो सकती है और मांसाहार नहीं करने वालों को भी संक्रमण से हो सकती है। 
अब कोरोना की दहशत के बाद दुनिया का ध्यान शाकाहार की ओर गया है। यही कारण है कि कोरोना फैलने के बाद जापान के योकोहामा बंदरगाह पर डायमंड प्रिंसेस क्रूज में फँसे भारतीय यात्रियों ने शाकाहार उपलब्ध करवाने की गुहार लगाई। इसके अलावा देश-विदेश में कई जगहों पर लोग अण्डा, मांस, मछली से मुँह मोड़ रहे हैं। भारत की आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति बढ़ता भरोसा भी इस बात का प्रमाण है कि वह मुख्यतः वनस्पतियों पर आधारित है एवं अतिरिक्त दुष्प्रभावों (साइड इफेक्ट्स) से मुक्त है। 
ऐसी स्थिति में भी मांसाहार और जीवहत्याओं के विरोध में तथा शाकाहार के पक्ष में किसी सुस्पष्ट नीतिगत पहल का अभाव चिंताजनक है। ऐसी पहल सामाजिक, सरकारी, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, वैज्ञानिक और चिकित्सकीय; सभी स्तरों पर होनी चाहिये। मानवता और दुनिया की रक्षा के लिए अपने पूर्वाग्रह छोड़ मनुष्य को अब अपने कुदरती आहार शाकाहार पर व्यापक विचार विमर्श करना चाहिये।  
रोग होने पर तो हर हाल में चिकित्सा करवानी ही है। लेकिन, चिकित्सा के साथ परहेज भी बताया जाना चाहिये। जानलेवा बीमारियों और महामारियों की स्थायी विदाई पर भी विचार किया जाना चाहिये। हकीकत यह है कि ऐसे भयानक रोगों के समूल खात्मे के लिए मांसाहार पर अंकुश बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार के मांसाहार में रोग निवारक और स्वास्थ्यवर्धक विटामीन सी बिलकुल नहीं होता है। मांसाहार में कार्बोहाइड्रेट्स और रेशे (फाइबर्स) भी नहीं होते हैं। मांसाहार नकारात्मक आहार है। मांसाहार रोगों का घर है। मांसाहार से कई प्रकार के कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, लकवा, पथरी, गुर्दों के रोग, मोटापा, दमा, उच्च रक्तचाप इत्यादि बीमारियाँ होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की बुलेटिन संख्या 637 के अनुसार मांस खाने से शरीर में लगभग 160 प्रकार की बीमारियाँ प्रविष्ट होती हैं। जिनमें से अधिकांश असाध्य और अनेक दुःसाध्य हैं। दुःखद यह है कि कुछ चिकित्सक भी इन तथ्यों से या तो अनजान हैं या अनजान बने रहना चाहते हैं। 
यह तथ्य है कि किसी भी जीव-जन्तु या पशु-पक्षी की ज्ञात-अज्ञात बीमारी मानव को बीमार कर सकती है, मार सकती है और महामारी का रूप भी ले सकती है। यही वजह है कि मांसाहार से जुड़ी प्राणिज बीमारियाँ मनुष्य के लिए भयावह खतरा बनती रही हैं। जबकि किसी भी प्रकार के शाकाहार से कभी कोई महामारी नहीं फैलती है। क्योंकि किसी भी प्रकार का वानस्पतिक रोग मनुष्य या अन्य प्राणी को कभी नहीं होता है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार 70 प्रतिशत भोजन विषाक्तता (फुड पॉइजनिंग) मांसाहार के कारण होती है। 
नौ मार्च 2016 को भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था कि मांसाहारी की अपेक्षा शाकाहारी व्यक्ति अधिक स्वस्थ जीवन जीते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी रोगों से बचने के लिए वनस्पति-आधारित आहार (शाकाहार) अपनाने की सलाह दी है। डॉ. गिरीश पटेल के अनुसार शाकाहार की सात मुख्य विशेषताएँ हैं- (1) यह कोलेस्टेरोल को कम करता है, (2) मूत्राम्ल (यूरिक एसिड) को घटाता है, (3) पाचन-तंत्र को रोगमुक्त रखता है, (4) मधुमेह (डायबीटीज़) नहीं होने देता, (5) विषमुक्त होता है, (6) इसके उत्पादन में न्यूनतम ऊर्जा लगती है, (7) मनुष्य का शरीर-तंत्र इसके लिए सर्वथा उपयुक्त है।
उधर, अमेरिका में बिल गेट्स, ट्विटर के संस्थापक इवान विलियम्स और बिज स्टोन जैसे महानुभावों ने एक ऐसी कम्पनी का समर्थन किया है, जो पशु-प्रोटीन के स्थान पर वनस्पति-प्रोटीन को महत्व देती है। इस कम्पनी का नाम है- बियांड मीट (गोश्त से परे)। कैलिफोर्निया की यह कम्पनी बाजार में वनस्पतिजन्य (शाकाहार से प्राप्त) प्रोटीन अपनाने के लिए बड़े पैमाने पर विकल्प और समाधान देती है। यह सर्वज्ञात चिकित्सीय तथ्य है कि पशु-प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और वनस्पति-प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। अमेरिका की नेशनल अकादमी ऑफ साइंस के अनुसार यदि मांसाहारी उनके भोजन में शाकाहार को बढ़ावा दें तो दुनिया में प्रतिवर्ष विभिन्न रोगों के कारण होने वाली 50 लाख अकाल मौतों को टाला जा सकता है। अमेरिकन डाइटिक एसोसिएशन के अनुसार शाकाहार में सभी आवश्यक पोषक तŸव मौजूद हैं। 
ऐसे अनेक शोध-निष्कर्ष शाकाहार को निरापद, पर्यावरण हितैषी, पौष्टिक, स्वादिष्ट, रोगमुक्त और आरोग्यदायी आहार सिद्ध करते हैं। यही कारण है कि दुनियाभर में लाखों व्यक्ति प्रतिवर्ष शाकाहारी जीवनशैली अपना रहे हैं। उम्मीद है कि अनेक प्रकार के कैंसर, बर्ड-फ्लू, स्वाइनफ्लू, कोरोना वायरस और निपाह जैसी घातक बीमारियों की भयावह त्रासदियों के बाद पशु-पक्षियों के प्रति मानव की करुणा फिर जागेगी तथा एक संवेदनशील स्वस्थ समाज के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा। 
(लेखक अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र के निदेशक है)
सुगन हाउस, 
18, रामानुजा अय्यर स्ट्रीट, 
साहुकारपेट, चेन्नई-600001
दूरभाष : 9952048107
 

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