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कोमा में विकास 
November 7, 2019 • मीरा सिंह 'मीरा' • व्यंग्य

*मीरा सिंह 'मीरा'*
निर्बल विपक्ष से किसी प्रकार के अहित के भय से मुक्त सुशासन बेफिक्री की चादर तान सुखद सपनों की सैर कर रहा था। ख्वाब में एक स्लोगन बार-बार प्रति ध्वनित हो रहा था "क्यों करें विचार ,ठीके  तो है सुशासन कुमार"। ख्वाब की खुमारी चेहरे पर नजर आ रही थी। तभी कुछ कुदरती शक्तियां जैसे आवारा बादल और खामोश नदियां जाने किस बात से खफा होकर त्योरी  चढ़ा लिए और विपक्ष के साथ कानाफूसी करने लगे। वर्षों से उपेक्षा के दंश झेल रहे  सीवेज नाले पहले ही सरकारी रवैए से आजिज थे। वह भी इनके साथ हो गए । फिर क्या था? बादलों ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरा पटना जल समाधि लेता नजर आने लगा ।लोग त्राहि-त्राहि कर उठे। क्या अमीर? क्या गरीब?जलप्रलय ने सब को अपने अपने घरों में नजरबंद कर दिया ।सीवेज नाले नदी का रूप अख्तियार कर तबाही का तांडव मचाने लगे। पॉलिथीन और कूड़ा कचरा पानी के सतह पर सामूहिक जल क्रीड़ा करते नजर आने लगे ।सुशासन बाबू अपने माथे पर हाथ रख कभी धरती तो कभी आसमान को निहारने लगे ।किसी तरह कुछ हीरे मोती जैसे नामी-गिरामी लोगों को पानी से रेस्क्यू किया गया। पर जो गरीब थे उनके मोहल्ले में परंपरा के अनुसार कोई झांकी तक मारने नहीं गया। जल जमाव के कारण  बदबू व सड़ांध से पटना वासियों का जीना मुहाल हो गया ।लोग खाने-पीने के सामानों के लिए तरसने लगे। पृष्ठभूमि तैयार थी। महामारी भी दस्तक देने की तैयारी करने लगी। खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे कहावत को चरितार्थ करते हुए सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा आला अधिकारियों पर, आला अधिकारी अपने अधीनस्थ  कर्मचारियों पर और कर्मचारी गण अपने अधीनस्थ  कर्मियों पर अर्थात जो सबसे कमजोर था उसके माथे पर फोड़ा गया। आखिर विकास को पालने पोसने का जिम्मा इन्हीं का  तो था ।हृष्ट-पुष्ट  विकास की ऐसी दुर्बल काया देख सब लोग विस्मित थे ।इंद्रदेव आश्चर्य से पूछ बैठे "बिहार का विकास कहां है ?क्या पटना बिहार के बाहर है? इस पर नारद जी व्यंग से मुस्कुराते हुए बोले "नारायण ,नारायण ,प्रभु आपकी लीला अपरम्पार  है ।आपको विपक्ष के साथ बैठे देख बिहार का विकास कोमा में चला गया है। पता नहीं अब वह खड़ा भी हो पाएगा कि नहीं ।" यह क्या कह रहे हैं मुनिवर? मैंने तो उसका बहुत नाम सुना था । सब एक स्वर में कहते थे  कि देखना है तो बिहार का विकास देखो ।यह तो टाय-टाय फिस्स  निकला ।"इंद्रदेव के चेहरे पर व्यंग भरी मुस्कान थी ।इस पर नारद जी समझाएं " नारायण नारायण, प्रभु आपने तो आइना दिखा दिया ।पर क्या नहीं जानते ?यहां के लोगों को भूलने की बुरी आदत है ।बड़ी बड़ी घटनाएं जैसे मुजफ्फरपुर बालिका कांड ,छठ घाट वाला भगदड़ ,गांधी मैदान का भगदड़,और न जाने कितनी दिल दहलाने वाली घटनाएं,  सब तो भुला चुके हैं ।दो-चार दिनों बाद जब स्थिति सामान्य होगी इस दृश्य को भी भूल जाएंगे नारायण नारायण  ******"नारद जी की बातें सुनकर इन्द्रदेव खामोश हो गए ।उनके आंखो के समक्ष मानव  इतिहास के पन्ने फड़फड़ाने लगे।नारद जी ने सौ फीसदी सत्य कहा ।

*मीरा सिंह" मीरा "प्लस टू महारानी ऊषारानी बालिका उच्च विद्यालय डुमराँव जिला बक्सर बिहार

 

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