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कोई ग़म नहीं
August 27, 2020 • ✍️राजेंद्र श्रीवास्तव • कविता

✍️राजेंद्र श्रीवास्तव     
जिएँगे हमेशा मुस्कुराते रहेंगे ,
कि अब ज़िंदगी में कोई ग़म नहीं
                   कोई ग़म नहीं
लबों पे तराने अब आते रहेंगे
कि अब ज़िंदगी में कोई ग़म नहीं I
                    कोई ग़म नहीं।
बहारें चमन में आती रहेंगी
मोहब्बत के नग़मे सुनाती रहेंगी,
कोई गिला ना शिकवा करेंगे,
कि अब ज़िंदगी में कोई ग़म नहीं,
                   कोई ग़म नहीं।
जब आएँगी जीवन में सावन की रातें
याद आएँगी उनसे हुई मुलाक़ातें,
मिलन के वो नग़मे गुनगुनाते रहेंगे,
कि अब ज़िंदगी में कोई ग़म नहीं
                    कोई ग़म नहीं।
लबों पे तराने अब आते रहेंगे
कि ज़िंदगी में कोई ग़म नहीं,
                   कोई ग़म नहीं।

*भिलाई नगर,दुर्ग

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