ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
किनारे पर आकर
November 21, 2019 • सविता दास • कविता

 


*सविता दास*
मन का समंदर,अशांत सा
विचारों की विशालता लिए
परेशान सा

व्याकुल आवेगों की लहरे
छूने को नभ तरसती
नाकाम कोशिशें
फिर खारेपन में मिलती

समाएं अपनी गहराई में
कितने वर्जित क्षण
नदियाँ फिर मिलती आशाओं की
लेकर अपनापन

बैरी चाँद भी आता है
मानो मुहं चिढ़ाने
अनगिनत ज्वार- भाटा
उपहार दे जाने

मन फिर भी
बूंदों में बादलों की
नई आशाओं का
संचार करना चाहता है

किनारे पर आकर यूंहीं
किसी तथागत के
चरण छूना चाहता है।

*सविता दास, तेज़पुर ,असम

अब नये रूप में वेब संस्करण  शाश्वत सृजन देखे
 

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733