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खुशियों के पल
August 21, 2020 • ✍️प्रेम बजाज • कहानी/लघुकथा
✍️प्रेम बजाज
अरे शालिनी तुम्हें यहां आए एक साल हो गया आज पहली बार तुम्हारे चेहरे पर चमक देखी है , क्या बात है ??
विमला  आज मैं अपने घर जा रही हूं , मेरा बेटा - बहु मुझे लेने आ रहे हैं ।
आज मेरे लिए बड़ा खुशी का दिन है ,बहुत आनंदित हूं मैं ।
शालिनी ज्यादा खुश ना हो ,ये चोंचले है उनके, पिछली बार भी तो तु कह रही थी । बहु लेने आई है , अरे वही यहां वृद्ध-आश्रम में छोड़ कर गई वो क्यूं लेने आएगी तुझे ।
आज आएगी  कल रो रही थी फोन पर माफी मांग रही थी । शालिनी  विमला को सारी बात बताती है  ।
रमेश  शालिनी का इकलौता बेटा है, दो  साल पहले पति का देहांत हो चुका था ‌। रमेश नौकरी करता है , पोता आदित्य पढ़ाई के लिए विदेश गया है , जब से उसके  दादा जी  नहीं रहे रोज़ दादी से बात करता था , बहु ( रीमा )को हर समय बाहर पार्टियों से फुर्सत नहीं  शालिनी अकेली पड़ गई , एक बार बहुत से कह दिया ..... बेटी कभी थोड़ा समय घर भी रहा करो ,मैं अकेली सारा दिन क्या करूं , कभी मेरे साथ भी वक्त गुजार दिया करो ।
बस पता नहीं रमेश को क्या समझाया अगले ही दिन सुबह दोनों ने मेरा सामान बांध दिया । मां मैं सारा दिन जॉब पर रहता हूं ,रीमा भी व्यस्त रहती है आप अकेले परेशान ना हों इसलिए आपके लिए अपना होम में बुकिंग करा दी है , हम जब भी समय मिलेगा आप से मिलने आया करेंगे , और आप को एक फोन ले देते हैं। ताकि समय - समय पर हम भी आप से बात करते रहे, लेकिन हां प्लीज़ आदि से कुछ मत कहिएगा , ख़ामख़्वाह पढ़ाई छोड़ कर आ धमकेगा ।
कल अचानक बिन बताए आदि आ गया ,शायद कुछ छुट्टियां होंगी और मुझे घर में ना पाकर पूछा तो मज़बूरी में बहुत ने सब कुछ बता दिया , तो आदि ने  कह दिया ..... माॅम - डैड आप लोग भी अपने लिए बुकिंग करा लो क्योंकि मैंने लड़की पसन्द कर ली है , और हम भी  आपके साथ नहीं रहना चाहते , जब आप अपनी मां के साथ नहीं रह सकते तो आप मुझ से ये उम्मीद मत किजिए , बेटे के मुंह से ऐसे शब्द सुन कर बहुत को अपनी गलृती का एहसास हुआ , मेरा पोता कल से भूखा है , कि खाऊंगा तो दादी के साथ । 
इतने में सब सामने आते हुए दिखाई देते हैं , पोता दौड़ कर दादी के गले लगता है , दोनों की आंखों से झर-झर गंगा - जमुना बस यही है , और बहु - बेटा दोनों दूर नज़रें झुकाए अपराधी जैसे खड़े हैं , शालिनी उठ कर उनके पास जाती है । अरे ऐसे क्या खड़े हो मिलोगे नहीं मां से ??
दोनों .... मां किस तरह आपसे नज़रें मिलाए , हिम्मत नहीं हो रही हमने बहुत गल्त किया आपके साथ हो सके तो हमें क्षमा कर दो । अब चलो अपने घर और हमें  फिर से वही खुशियों के पल लौटा दो । 
सभी आश्रम वाले शालिनी को बाहर तक छोड़ने आते हैं , और सभी दुआ करते हैं कि सब बुजुर्ग अपने ही घरों में सुरक्षित रहे , इस अपने घर( वृद्ध- आश्रम) में नहीं ।
 
*जगाधरी (यमुनानगर)
 

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