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खुद पे रखते हैं वो गुमान बहुत
June 6, 2020 • संगीता श्रीवास्तव 'सुमन' • गीत/गजल

*संगीता श्रीवास्तव 'सुमन'

खुद पे रखते हैं वो गुमान बहुत
जो बने फिरते हैं महान बहुत |

यूँ तो सर पे है आसमान बहुत
राह मुश्किल है इम्तिहान बहुत |

फ़िक्र का है यहाँ उफ़ान बहुत 
थक गया है वो पासबान बहुत|

कितनी उलझन में डाल रख्खा है
देता रहता है जो बयान बहुत |

हारकर ज़िन्दगी गये कितने 
और इनको है इत्मिनान बहुत |

रोककर क्या हुआ उन्हें हासिल 
जो हैं पहले से बेज़ुबान बहुत |

वो कतरते हैं मेरे पर अक्सर 
जिनको डर है मेरी उड़ान बहुत |

इश्क और मुश्क कब कहाँ छुपते
सिर्फ़ आँखों की है ज़ुबान बहुत |

जोश में होश वो नहीं खोते 
मुश्किलों के जो दरमियान बहुत |

*छिंदवा़ड़ा (म.प्र.)

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