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खुद के भीतर सुकून ढूँढो
July 31, 2020 • ✍️भावना ठाकुर • लेख

✍️भावना ठाकुर
रात के मद्धम बहते पहर में अंधेरे में नैंन मूँदे सोच की दहलीज़ पर बैठे जो सबसे साफ़ नज़र आता है वो खुद के भीतर छाया अंधेरा है। जिसे हम उजालों की रोशनी में नहीं देख सकते, नहीं मिल सकते। सन्नाटों भरी रातें रुबरु करवाती है खुद को खुद से।  दिनरथ पर दौड़ते हम सिर्फ़ खुद को देख पाते है। कहाँ फुर्सत इतनी की झकझोर पाते, टटोल पाते बस खुद से ही भागते रहते है।
पर शांत सन्नाटों भरी रात में जब नींद आँख मिचौली खेलती है तब खुद ब खुद मन रूह के भीतर गोते लगाते कुछ टटोलता है। मसक्कत और जद्दोजहद के बाद मुलाकात होती है अपने ही अक्स से  भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में जो हमसे बिछड़ गया है। पर शायद उसमें भी हम अटपटी चुनौतियां या रिश्तों की गुत्थियां ही ढूँढते है। 
सुकून का सागर तलाशने की कोशिश तो करते ही नहीं, खुशीयों की गठरी खोलने का कष्ट करते ही नहीं, जो ज़िंदगी के बिहड़ जंगल में गुम है कहीं। खयालों के घोड़े दौड़ते रहते है मकसद से भटक कर। शब भर सहलाते रहते है हम खयालों को और बह जाते है खयालों के उडनखटोले पर सवार होकर सीधे अवसाद की गुफ़ाओं में। ये नहीं सोचते की एक झिलमिलाती राह ओर भी है जिस पर चलकर हम सफ़र करते सकारात्मक ऊर्जा तक पहुँच सकते है। 
एक छोटी सी बात पर विचार करें तो सारे दु:खों से निजात मिल जाएगा वो यह की ज़िंदगी में जो कुछ हो रहा है या जो होने वाला है क्या उस पर हमारा नियंत्रण है। या कुछ भी हमारे हाथ में है ? तो जब हमारे हाथ में कुछ भी नहीं तो उसके बारे में सोचकर खुद को नकारात्मक खयालों को सौंप कर अवसाद की खाई में धकेलना कहाँ की समझदारी है। 
बहुत लोगों को कहते सुना है कि कुछ अच्छा नहीं लगता, कहीं मन नहीं लगता। ना ठीक से खाते-पीते है ना ठीक से सो पाते है और उसी एक खयाल को मन में बार बार दोहराते रहते है। मन का गुलाम है तन जो मन की स्थिति का अनुसरण करते मन की हर गतिविधियों के सांचे में ढ़लकर प्रतिक्रिया देता है। मन खुश होगा तभी तन तंदरुस्त होगा। तो  खुद की क्षमता को पहचानों, खुद में विश्वास रखो। डिप्रेशन यानी अवसाद को मन की दहलीज़ पर कदम रखने दोगे तो वह पूरे शरीर पर कब्ज़ा करने में माहिर होता है। चिंता किसी प्रश्न का हल नहीं। 
रात के सुकून सभर लम्हों में गतिशील मन को ईश के हाथों सौंप कर ओम के उच्चारण संग हर नकारात्मता से निजात पा लो। जिसने जन्म दिया है ज़िंदगी वही चलाएगा इस विश्वास के साथ वर्तमान का सफ़र हंसी खुशी जी कर ज़िंदगी को आसान कर लो।

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