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कौन तकता है बार-बार किसे
November 2, 2019 • नवीन माथुर पंचोली • गीत/गजल

*नवीन माथुर पंचोली*

कौन तकता है बार-बार किसे।
इस क़दर राहे  इंतज़ार  किसे।
 
अपनी आँखों में कुछ नमी लेकर,
यूँ  रुलाता   है  जार-जार किसे।
 
जब   निभाये  हैं  वास्ते  उसने,
फिर  जताता  है  एतबार किसे।
 
ख़ुद छुपाता है ग़म सभी अपने,
और कहता   है राज़दार  किसे।
 
रात की नींद ,  चैन  सब  खोया,
दे दिया उसने अपना प्यार किसे।
 
*नवीन माथुर पंचोली,अमझेरा धार,मप्र  मो.9893119724
 

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