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कर शरारत मुस्कुराएगा कभी
May 14, 2020 • हमीद कानपुरी • गीत/गजल
*हमीद कानपुरी
 
कर शरारत मुस्कुराएगा कभी।
अश्क बनकर झिलमिलाएगा कभी।
 
पास  आकर  दूर  जाएगा कभी।
ख्वाब में आकर सताएगा कभी।
 
दूर  से  ठेंगा दिखाएगा कभी।
बात  दिल की  आ सुनाएगा कभी।
 
रूठने  का   है अलग अंदाज कुछ,
दूर  ज़्यादा   रह न  पाएगा  कभी।
 
तीरगी  का   दूर   होना   लाजिमी,
बल्ब  कोई   आ  जलाएगा  कभी।
 
इश्क़ का  होने लगा उसपर असर,
अब  नहीं  नजरें   चुराएगा  कभी।
 
इक  धरोहर   छोड़ जाएंगे  हमीद,
गीत  ग़ज़लें   कोई  गाएगा  कभी।
 
*हमीद कानपुरी
 

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