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कैसे आए मधुमास
January 22, 2020 • *अशोक 'आनन ' • गीत/गजल

*अशोक 'आनन '

पीत - पर्ण - से आज  पड़े -
भावों के अनुप्रास ।
ऐसे  में  अब  कैसे  आए -
पदमाकर का मधुमास ?
 
जंगल      सारे      कट       गए ।
पेड़     पथ     से     हट      गए ।
घनी      छांव     के     शामियाने -
रूमाल   में   अब   सिमट   गए -
 
चारों तरफ अब पसर गए -
धूप   के   आवास  ।
 
कलियां  आंखें  खोल  सकीं  न ।
भंवरों  से  कुछ   बोल  सकीं  न।
लपटों  में  फूलों  को  घिरा  देख -
तितलियां उन पर डोल सकीं न ।
 
गुलशन ही अब रोज़ करें -
बहारों  की  अरदास ।
 
भाव     हृदय    में    आएं    न ।
पदमावत     लिखे    जाएं     न।
गीतों   की।  कोयल   मौन।   है -
कुहू - कुहू    अब   सुनाए    न ।
 
पतझड़ ही अब दे रहे -
मधुमास को वनवास ।
 
*अशोक 'आनन '
 मक्सी -जिला - शाजापुर ( म. प्र.)
   
 
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