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जिजीविषा शक्ति है हमारी
June 20, 2020 • रविकान्त सनाढ्य • कविता
*रविकान्त सनाढ्य
 
हिम्म्मत तो देखिए 
इस पेड़ की ! 
काट दिया गया है बुरी तरह , 
पर सलाम है इसकी 
अदम्य जिजीविषा को ! 
फूल उठीं हरी - हरी कोंपलें 
फिर से, 
उग आए इस पर फल  ! 
जीवन साँस लेने  लगा 
फिर से ! 
हर समस्या का है हल , 
कुछ सीख ले ले मनुष्य , 
हिम्मत और पुरुषार्थ 
विवेक और आशा , 
उद्यम और अभिलाषा 
सभी गुण तो दिये हैं 
तुम्हें परमात्मा ने ! 
फिर क्यों हो जाते हैं , 
पस्त तुम्हारे हौंसले ? 
आत्मघात का विचार सर्वथा 
बानी है !
आओ, कुछ सीख ले   लो , 
तुम प्रकृति के क्रिया-कलापों से  ! 
लहलहाते खेतों को देखो,
उपवन में मदमाती डालियों को, 
उल्लास का अंकुर है उनमें !
आशा और अभिलाषा जगाओ, 
स्वयं में फिर से !
*भीलवाड़ा ( राज.)
 

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