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जीवन हैं बहुत छोटा 
June 20, 2020 • सुनील कुमार माथुर • कविता
सुनील कुमार माथुर
जीवन हैं बहुत छोटा 
समय रहते अपनी गलतियों को सुधार लों
कहीं ऐसा न हो कि बाद में 
ये छोटी - छोटी गलतियां 
हमारी प्रगति में बाधक बन जायें 
बेहतर उन्नति के लिए 
अपने व्यवहार और
कार्यप्रणाली में बदलाव जरूरी है 
एक सभय पर एक ही काम करें 
कार्य में प्रगति होंगी 
मन प्रसन्न रहेगा चूंकि 
आपकी सफलता के पीछे 
आपके परिश्रम के साथ ही साथ 
कई लोगों की दुआ भी हैं 
जीवन हैं बहुत छोटा 
समय रहते आपनी गलतियों को सुधार लें 
कहीं ऐसा न हो कि बाद में 
अपनी गलतियों की वजह से 
हमारी प्रगति में बाधा आयें 
चिंता त्यागें  , जो होगा अच्छा होगा
व्यर्थ का सोचना बंद करें 
बस आपके वाक चातुर्य से 
आपके कार्य बन जायेंगे 
समय की अस्थिरता से तनिक भी 
परेशान न हो
कार्य स्थल पर खुशनुमा माहौल रहेगा 
कभी भी अनजान पर भरोसा न करें 
धैर्य रखना होगा चूंकि 
जल्दबाजी में नुकसान होगा
परोपकारी बनें  , सबका सम्मान करें 
जीवन हैं बहुत छोटा 
समय रहते आपनी गलतियों को सुधार लें 
कहीं ऐसा न हो कि बाद में 
अपनी ही छोटी- छोटी गलतियां 
हमारी प्रगति में बाधक बन जायें 
*पालरोड जोधपुर राजस्थान 
 

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