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जय-जय मध्यप्रदेश
November 1, 2019 • अशोक आनन • कविता

*अशोक आनन*
जय - जय मध्यप्रदेश ।
भारत का यह हृदय- प्रदेश ।

सतपुड़ा और विंध्याचल से -
इसकी शान निराली ।
शिप्रा , चंबल और नर्मदा -
लाएं यहां खुशहाली ।
महाकाल की पावन नगरी -
तीरथ सम परिवेश ।

सांची , मांडव और खजुराहो -
इसकी शान बढ़ाते ।
विक्रम , कालिदास रत्न -से ।
चम - चम चमचमाते ।
सद्भाव का सूरज आकर -
देता रोज़ संदेश ।

गम्मत , छाहुर , रास , तमाशा -
स्वांग , तुर्रा , माच , कलंगी ।

केसर , चंदन सम है माटी -
पावन और सुगंधी ।

बोली गुड़ की डली सरीखी -
इन्द्र - धनुषी वेश ।

संस्कृति का संगम होता -
लगते जब यहां मेले ।
फागुन में खूब रंग बरसते -
सावन में डरते झूले ।
गौरव से ये गाथा कहते -
वीरों के अवशेष ।

*अशोक आनन, मक्सी,जिला-शाजापुर (म.प्र.)मोबाइल नं :9981240575

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