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जलाया शमा फिर बुझाया उसे क्यूं
August 24, 2020 • ✍️प्रदीप ध्रुव भोपाली • गीत/गजल

✍️प्रदीप ध्रुव भोपाली

जलाया     शमा     फिर    बुझाया   उसे   क्यूं।
कदम    खींचना     था     उठाया   उसे    क्यूं।
*
तुम्हारे      ही     बूते     मिरी    ज़िन्दगी  थी,
निभाने    से     पहले    मिटाया   उसे    क्यूं।
*
मिरी     हसरतों     को     दिया    आब    तुमने,
मिरी     जां    भी     थे     तुम   भुलाया  उसे  क्यूं।
*
चले     थे     तुम्हारे     सहारे   अभी   तक,
कि     पर्दा     गिरा    कर   उठाया   उसे     क्यूं।
*
अभी     सोच    लो    वक्त    जाने   से     पहले,
वो    जो     सिलसिला    था    बढ़ाया    उसे   क्यूं।
*
रुलाना     अगर     था    किसी   को    हंसाकर,
शरारत    किया    फिर   हंसाया उसे     क्यूं।
*
बड़े     चाव     से    "ध्रुव"    किया ख़ैरमक़दम,
कि    दिल    तोड़कर   आजमाया उसे    क्यूं।
*भोपाल,मध्यप्रदेश
 

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