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जगन्नाथ रथ यात्रा
June 24, 2020 • राम गोपाल राही • कविता

*राम गोपाल राही
चल भीड़ में सम्मुख देख जरा,
 विमान के दर्शन होते हैं |
उत्कंठा मन में जाग उठे ,
भगवान के दर्शन होते हैं ||
 
लाखों की भीड़ असंख्यों की  ,
सचमुच में भक्ति धारा की |
यह भीड़ अनोखी होती है ,
मत पूछो भव्य नजारा की ||
 
हम हरि (प्रभु )निहारा करते हैं ,
 हरि हमें निहारा करता है |
जय घोष गूँजता  जगन्नाथ ,
पल पल में पुकारा जाता है  ||
 
  वहाँ जगन्नाथ के अपने दर, 
  दर्शन  हीं भक्ति होती है |
भक्ति पथ दर्जन पूजन व ,
प्रदक्षिणा भक्ति होती है ||
 
सच जगन्नाथ जग के स्वामी ,
की पुरी अनोखी लगती है |
भक्तों का उमड़े  ज्वार वहाँ ,
अनुरक्ति अनोखी होती है ||
 
भगवान विष्णु अवतार कृष्ण ,
उत्सव व धाम उन्हीं का है |
सुसज्जित रथ में हरि विचरे ,
चैतन्य धाम उन्हीं का है ||
 
सौभाग्यशाली जन होते ,
जो चले पुरी में आते हैं |
अनुरक्त  ह्रदय में  ललक लिए , 
भगवान के दर्शन पाते हैं ||
 
 
मंदिर का दिव्य शिखर ऊँचा ,
विष्णु का चक्र सुदर्शन वहाँ |
 है भव्य भव्य मंदिर की ,
सच शोभा है अभिराम वहाँ ||
 
 वहाँ चक्र पताका दर्शन से ,
अभिज्ञान चेतना जगती है |
हो  रोम रोम में जिज्ञासा ,
आध्यात्म चेतना जगती है ||
 
जगदीशपुरी पथ भक्ति का ,
हृदय में दर्शन अभिलाषा |
अर्पित हो जिनका तन मन वहाँ,
 पूरी  हो उनकी अभिलाषा ||
 
 नित ठंडी हवा मन हर लेती ,
वहाँ शोर  भी प्यारा होता है |
मन मुदित रह रहे हरिदर्शन से ,
अनुपम वो  नजारा होता है ||
 
सागर तट कुछ ही दूरी पर ,
पुरी जगन्नाथ का धाम वहाँ |
 हरि तीर्थ अनोखा धरती पर ,
पावन  अनुपम है धाम वहाँ ||
*लाखेरी ,जिला बूँदी( राज )
 

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