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इंडिया  नही  भारत 
July 15, 2020 • ✍️सुरेश   शर्मा • कविता

✍️सुरेश   शर्मा

भारत देश हमारा प्यारा सा ,
जिससे  अपनेपन से  लथपथ ;
भीगी-भीगी  खुश्बू वाली महक ,
हमे भाव  विभोर करती  है ।
मिट्टी  से  जिसके  सोंधी-सोंधी  महक ,
हमे अपनी  ओर आकर्षित करती  है ।
नई इंडिया की नही हमारे दिल में ,
भारत की  पुरानी संस्कृति  बसती है ।

इंडिया नाम के  सम्बोधन  से  हमे ,
परायेपन की हल्की सी बू  टपकती  है ।
विदेशी  लिबास  में सजी  लिपटी ,
स्वदेशी  होने  की  कमी  खटकती  है ।
हमे दूसरों के दिए नाम वाले इंडिया  में ,
अपनी वेद पुराण और शास्त्रों वाली ,
हंसती  गाती  सात सुरों में गाने वाली ;
भारत की अनुपस्थिति  खलती  है ।

पहाड़ी झरनों की झीनी-झीनी फुहारों का ,
ब्रह्मपुत्र सा विशालकाय  सीने वाला  ;
पावन पवित्र  माँ गंगा वाली  धरती  का ,
कल कल स्वर में गीत गाएं नदियों का ;
हमारे कानों  में संगीत  खनकती  है ।
इंडिया की अंग्रेजी की  दूरत्व वाली नहीं ,
हम सब को  एक डोर मे  पिरोने वाला ;
अपनत्व वाला भारत हम सब  में बसती  हैं ।

*नूनमाटी  गुवाहाटी  (असम)

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