ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
हिन्दी की बिंदी
September 13, 2020 • ✍️प्रेम बजाज • कविता
✍️प्रेम बजाज
हिन्दी की बिंदी
सुन्दर लगती है
ज्यों सुहागिन के
माथे बिंदी सजती है।
अ, आ, अं और 
क, ख, ग से सारे
शब्दों ने लिया जन्म है ,
हिन्दी का 
अस्तित्व अद्भुत,
अजर और अमर है  ।
हिन्दू- मुस्लिम ,
सिख - ईसाई
आपस में सब भाई - भाई ,
हिन्दी ने ये बात सिखाई ।
हिन्दी सब को मन से जोड़ती ,
हमें सभ्यता की ओर मोड़ती ।
हर हिन्दुस्तानी को प्यार हिंदी से ,
संस्कृति की पहचान हिंदी से ।
हर दिन, हर पल  रहते हम
हिन्दी से दूर ,
विदेशी भाषाएं बोल-बोल कर 
उच्च साबित करते हैं ,
हिंदी  में ना बात करके
हिंदी को अपमानित करते हैं ।
हिन्दी की बहना उर्दू ने
हमको शायरी सिखाई है ,
फिर कैसे कह दे 
हम हिन्दी अपनी नहीं पराई है ।
हिन्दी बोलने - पढ़ने से
भला क्यों आती हमको शर्म है ,
हिन्दू संस्कृति ही
सबसे बड़ा धर्म है ।
मातृभाषा यही है ,
राष्ट्र भाषा यही है ,
कैसे ना हम इसका मान करें 
आओ मिल कर सब
हिंदी का उत्थान करें ।
एक दिन हिंदी दिवस मना कर
तीर क्या कोई मार पाएगा ,
जो है सच्चा हिन्दू वो
सदा ही हिंदी के गुण गाएगा ।
सम्मानित करो राष्ट्र भाषा 
हम सब की यही अभिलाषा
 
*जगाधरी (यमुनानगर) 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब हमारे वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw