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हिन्दी का दर्जा ऊँचा हो
September 14, 2020 • ✍️ रामगोपाल राही • कविता
✍️ रामगोपाल राही
निज राष्ट्र चेतना निज भाषा ,
स्वाभिमान सभी का होता है |
अभिव्यक्त देश की भाषा में ,
संज्ञान सभी का होता है ||
 
अनुरक्त देश के तन मन में ,
हिन्दी वो जीवन धारा है |
हिन्दी निज देश  की भाषा से, 
गर्वित यह देश हमारा है ||
 
हर देश का अपना चिंतन व ,
भाषा भी अपनी होती है |
स्वच्छन्द सोच व अभिव्यक्ति ,
निज भाषा में ही होती है ||
 
- लिख -पढ़ बोले व्यापक हो ,
भाषा -वो प्यारी होती है |
जाने जन  देश  के अधिसंख्य ,
वो राष्ट्र भाषा होती है ||
 
निज देश की अपनी भाषा में ,
संस्कार परिष्कृत होते हैं |
निज कंठ में  निज ही वाणी हो ,
विचार अधिकृत होते हैं ||
 
सच कहता सबको हिन्दी  ही, 
कर्तव्य सिखाने वाली है| 
संस्कृति  - देश की गरिमा की ,
हर बात बताने वाली है ||
 
यहाँ लोकतंत्र का शासन है ,
स्वच्छन्द सभी है भारत में |
हर बात राष्ट्र की भाषा में ,
जानेंगे ! अपने भारत में |
 
निज राष्ट्र की भाषा हिन्दी का ,
सम्मान देश में ऊँचा हो |
शासन के ढंग प्रणाली में ,
हिन्दी का दर्जा ऊंचा हो  ||
 
*लाखेरी,जिला बूँदी (राज )
 

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