ALL लॉकडाउन से सीख कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
हल्दी घाटी - युध्द 
May 24, 2020 • रामगोपाल राही • कविता

*रामगोपाल राही
 
बिगुल बजे रणभेरी संग में ,
राणा की ललकार उठी |
मुगल सेना  से -टकराने ,
राणा की तलवार उठी ||
 
रणवीरों  की आवाजों से ,
हल्दीघाटी गूंजी थी |
शाही सेना राणा आगे ,
लगती धूजी धूजी थी ||
 
एक तरफ महाराणा उनका ,
शौर्य तेज महान था |
सामने सम्राट ,अकबर का ,
गर्व बड़ा अभिमान था ||
 
युद्ध नगाड़े बजे निरंतर ,
शंख बजे रणभेरी थी |
बुलंन्द हौसले महाराणा के ,
हुई न थोड़ी देरी थी ||
 
भीषण युद्ध लड़ा था उनने ,
 मरे मुगल दल सेनानी |
छक्के छूटे मुगलों के थे ,
माँग सके ना वो पानी ||
 
महाराणा की सेना ने   सच ,
नाको चने चबाए थे |
आकुल व्याकुल मुगल सैन्य के ,
पल-पल होश उड़ाए थे ||
 
भिड़े रुण्ड से रूण्ड मुंड तो ,
कुचले अश्व की टापों से |
धूल धूसरित गगन दिशाएँ ,
धूल अश्व की टापों से ||
 
हल्दीघाटी युद्ध का समझो ,
खौफनाक वो मंजर था |
खून की नदियाँ बह निकली थी ,
बड़ा भयानक मंजर था ||
 
महाराणा का भाला भारी ,
उसके वार प्रहार से |
शत्रु मरे अनेकों उनकी 
दूधारी तलवार से ||
 
ठोकर खाते रुण्ड धड़ों पर , 
 घोड़े दौड़े जाते थे |
घोड़ों की टापू से बिखरे ,
शव छलनी हो जाते थे ||
 
 सैनिक कम थे पर राणा की ,
 क्षमता में थी कमी नहीं |
लड़ते ही वो  रहे निरंतर ,
गति लड़ने की थमी नहीं ||
 
हल्दीघाटी पट गयी थी ,
मुगल सैन्य दल लाशों  से |
दिवस  दिशा नभ धूमिल धूमिल ,
धूल अश्व की टापों से ||
 
मुगल सेना हौसला पस्त ,
पकड़ सकी  न राणा को |
युद्ध में भी छका छका वो ,
 जीत सकी ना राणा को ||
 
 धैर्य धीरता  और वीरता ,
महाराणा सी कहीं नहीं |
महाराणा के शौर्य तेज सी 
मिलती कोई नजीर नहीं ||
 
बलशाली महा योद्धा राणा ,
उनके जैसा और नहीं |
इतिहास में उनसे बढ़ के ,
कोई भी सिरमोर नहीं ||
 
स्वाभिमानी महाराणा की ,
गाथा गौरवशाली है |
शूर वीरता गरिमा उनकी ,
जग में महिमा शाली है ||
 
*रामगोपाल राही लाखेरी
 

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.comयूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw